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इन्होंने ही किया था देश को दहला देने वाले आतंकियों को काबू, देखिए कैसे

Sun, 26 Nov 2017 01:20 PM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Sun, 26 Nov 2017 01:20 PM IST
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nsg commando training and their contribution to 26/11 terror attack in mumbai
- फोटो : अमर उजाला
आज 26 नवंबर है। 2008 में आज ही के दिन मुंबई के ताज होटल समेत अन्य जगहों पर हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। इस घटना ने एक ओर पूरी दुनिया के सामने आतंक का खौफनाक चेहरा दिखाया, तो दूसरी ओर उस आतंक का जवाब देने वाले वीर एनएसजी कमांडो की जांबाजी को। 60 घंटे चले इस ऑपरेशन की लाइव रिपोर्टिंग ने पूरी दुनिया के सामने एनएसजी की बहादुरी को घर-घर तक पहुंचा दिया।
nsg commando training and their contribution to 26/11 terror attack in mumbai
- फोटो : अमर उजाला

1984 में स्थापना के बाद से मुंबई आतंकी हमला एनएसजी के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ है। इस घटना ने देश की सुरक्षा के लिए नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया और इसके बाद गृह मंत्रालय की ओर से एनएसजी को और मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो अब भी जारी है। आतंकी घटनाओं के बदलते पैटर्न को लेकर भी एनएसजी अब चिंतित है और इसके लिए लगातार नए प्रयोग और तकनीक से खुद को सक्षम बनाया है।

nsg commando training and their contribution to 26/11 terror attack in mumbai
- फोटो : अमर उजाला

मुंबई हमले के वक्त केवल मानेसर में ही एनएसजी का कैंप था। यहीं से पूरी टीम आतंकवादियों से लोहा लेने के लिए मुंबई गई थी, जिसमें एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन शहीद हो गए थे, जबकि पटौदी से ताल्लुक रखने वाले कमांडो सुनील यादव को दो गोलियां लगी थीं। 16 अक्तूबर को एनएसजी के स्थापना दिवस पर महानिदेशक सुधीर प्रताप सिंह ने कहा था देश में किसी भी हमले से निपटने में सक्षम हैं। एनएसजी विश्व की एक ऐसी कमांडो टीम है, जहां कोई गलती नहीं होती है। उन्होंने वर्ल्ड क्लास जीरो एरर फोर्स नाम दिया था। महानिदेशक ने एनएसजी को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ काउंटर टेरररिज्म का दर्जा देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि एनएसजी कमांडो के बौद्धिक विकास के लिए आतंक विरोधी अध्ययन के लिए अलग से सेंटर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। 

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nsg commando training and their contribution to 26/11 terror attack in mumbai
- फोटो : अमर उजाला

5 रीजनल हब पर 16 टास्क फोर्स हमेशा रहती हैं तैयार: शुरुआती दौर में आतंकी घटना के लिए केवल दिल्ली-एनसीआर तक एनएसजी का ध्यान अधिक केंद्रित था, लेकिन मुंबई हमले के बाद एनएसजी ने पांच रीजनल हब की स्थापना की। मुंबई, चैन्नई, हैदराबाद, गांधीनगर और कोलकाता में इसकी स्थापना की गई, जिससे अब यह देश के चारों दिशाओं को पूरा कवर करता है। इसके लिए आज एनएसजी की 16 टास्क फोर्स हैं, जो देश के किसी भी कोने में विमान द्वारा तुरंत जाने को तैयार रहती हैं। पांच रीजनल हब को ट्रेनिंग नोड्स का दर्जा दिया गया, जो राज्य पुलिस फोर्स की क्षमता निर्माण में भूमिका निभाता है।

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nsg commando training and their contribution to 26/11 terror attack in mumbai
- फोटो : अमर उजाला

विश्व के बेहतरीन हथियार: वक्त के साथ एनएसजी ने खुद को अत्याधुनिक बनाया है। एनएसजी कमांडो की मारक क्षमता, सर्विलांस और कम्युनिकेशन में व्यापक बढ़ोतरी हुई है। एनएसजी ने आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए हाई इंटेनसिटी गाड़ी शेरपा, हाईजैक से निपटने के लिए मार्स व्हीकल व नाइट विजन डिवाइस और स्नीपर राइफल को शामिल किया है। इसके अलावा सर्विलांस रोबोट, यूएवी डिवाइस समेत अन्य आधुनिक उपकरणों को भी शामिल किया है।

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