ग्रेटर नोएडा में युवराज की मौत मामले की जांच कर रही एसआईटी के सामने अधिकारियों ने अजब दावे किए हैं। तीन सदस्यीय जांच टीम को दिए गए बयान और जवाब में अधिकारियों ने कहा कि वीडियो में अंत तक दिख रही रोशनी मोबाइल टार्च की नहीं युवराज के कार की थी।
यहीं नहीं कॉल डिटेल का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया युवराज को बचाने के लिए पौने दो घंटे नहीं बल्कि आधे घंटे से भी कम का समय मिला था। वहीं युवराज के पिता और हादसे के चश्मदीदों ने अब तक बचाव के लिए पौने दो घंटे और मोबाइल टार्च जलाकर मदद मांगने की बात कही है।
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नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया
- फोटो : अमर उजाला
एसआईटी ने जांच मंगलवार तक पूरी की
सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड का हवाला देकर यह दावा किया कि 12:20 बजे के बाद युवराज की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई थी। एसआईटी ने जांच मंगलवार तक तकरीबन पूरी कर ली। 16 जनवरी को हादसे की जांच 20 जनवरी से शुरू हुई थी। जांच में एसआईटी ने मंगलवार को भी नोएडा प्राधिकरण से कुछ सवालों के जवाब मांगे।
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घटना स्थल पर युवराज की मौत को लेकर जॉच करने पहुंची एसआईटी की टीम
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यह जवाब स्पोर्ट्स सिटी के उस प्लाट पर प्राधिकरण के वर्क सर्कल 10 से पहले की गई कार्रवाई को लेकर है। वर्क सर्कल की तरफ से बताया गया था कि बिल्डर को भरे हुए पानी को लेकर नोटिस जारी किया गया था। इसके साथ होर्डिंग्स लगवाए गए थे जिन्हें हटवा दिया गया था।
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नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया
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इस पर जुर्माना भी लगवाया गया था। इस पर प्राधिकरण की तरफ से भेजे गए जवाब में बताया गया है कि प्राधिकरण की बाह्य विज्ञापन पॉलिसी है। इसमें महज शुल्क जमा करवाकर और मंजूरी के बाद ही विज्ञापन की मंजूरी बाह्य विज्ञापन विभाग देता है। पानी निकलवाने के लिए पूर्व में की गई तैयारियों की जानकारी भी वर्क सर्कल की तरफ से दी गई है।
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नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया
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मुख्यमंत्री कार्यालय में रिपोर्ट पहुंचने के बाद साफ होगी तस्वीर
हादसे की जांच एसआईटी ने तकरीबन पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस घटना को लेकर गंभीर हैं। पूर्व में मेरठ आने पर भी मुख्यमंत्री ने जांच दल के अधिकारियों से जांच को लेकर जानकारी ली थी। मंगलवार की शाम तक एसआईटी की तरफ से रिपोर्ट सौंपी जानी थी।