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फांसी की सजा के बाद 'नरपिशाच कोली' ने कोर्ट में कही ऐसी बात कि जज भी हो गए हैरान!

Sun, 30 Jul 2017 08:18 PM IST
संजय शिशौदिया/राहुल कुमार/अमर उजाला, गाजियाबाद
संजय शिशौदिया/राहुल कुमार/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Sun, 30 Jul 2017 08:18 PM IST
सार

सजा सुनाए जाने से पूर्व सोमवार सुबह सजा पर बहस के दौरान सुरेंद्र कोली ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने केस को साबित नहीं कर सका है।

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nithari case: surinder koli blamed court for not hearing his version after death sentence
- फोटो : अमर उजाला

सजा सुनाए जाने से पूर्व सोमवार सुबह सजा पर बहस के दौरान सुरेंद्र कोली आक्रोशित हो गया। कोली का कहना था कि उसके साथ अन्याय हुआ है। अभियोजन पक्ष अपने केस को साबित नहीं कर सका है। कोली ने कहा कि यह कोर्ट का नहीं बल्कि सीबीआई का आदेश है। वह अपनी सजा के बारे में क्या कहे, कोर्ट जो चाहे फैसला सुना दे। विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने कोली को समझाया कि वह अपनी सजा पर बहस कर सकता है। इस पर कोली ने कहा कि डीएनए टेस्ट से लापता बच्चों और उनके परिजनों का तो पता चलता है, मगर इससे यह कहां सिद्ध होता है कि उनके साथ मैंने रेप की कोशिश की या मैंने उनकी हत्या कर दी। अभियोजन दस्तावेजों के आधार पर उसके खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर सका है। यहां तक कि उसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक नहीं दी गई। ऐसे में कैसे वह न्याय की उम्मीद कर सकता है।

nithari case: surinder koli blamed court for not hearing his version after death sentence
- फोटो : अमर उजाला

पंधेर के अधिवक्ता ने दिया बीमारी और आठ साल जेल का हवाला:
मोनिंदर सिंह पंधेर के अधिवक्ता देवराज सिंह ने सजा पर बहस करते हुए सिर्फ इतना ही कहा कि उनका मुवक्किल बीमार है और पूर्व में आठ साल जेल में बिता चुका है। उसके साथ उदारता का व्यवहार किया जाए और कम से कम सजा से दंडित किया जाए।
अभियोजन ने मांगी फांसी की सजा
सजा पर बहस करते हुए सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा और खालिद खान ने कहा कि अभियुक्त ने एक ऐसी असहाय निर्धन युवती को अपना शिकार बनाया जा ेकि घरों में झाड़ू पोंछा का काम करती थी। अपनी हवस का शिकार बनाने के लिए अभियुक्त ने उसकी हत्या कर दी। एक पशु के द्वारा भी ऐसा कृत्य नहीं किया जाता। मृतका की आत्मा को तभी शांति मिलेगी, जब कोर्ट अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाएगी।

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टाइम लाइन: कब क्या हुआ:
सुबह 11.25 बजे: डासना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद आरोपी सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को लेकर पुलिसकर्मी सीबीआई कोर्ट पहुंचे।
सुबह 11:27 बजे: कोर्ट अर्दली द्वारा आवाज लगाए जाने पर पंधेर-कोली को न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की कोर्ट में पेश किया गया।
सुबह 11:30 मिनट: सजा पर बहस शुरू हुई। अभियोजन ने पंधेर-कोली को फांसी दिए जाने की मांग कोर्ट से की।
सुबह 11: 40 बजे: कोली ने आक्रोशित होकर कोर्ट से कहा कि उसके साथ अन्याय हुआ है।
सुबह 11: 45 बजे: सजा पर बहस के बाद कोर्ट ने फैसला दोपहर 12.45 बजे तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
दोपहर 12: 40 बजे: पंधेर-कोली को सीबीआई विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की कोर्ट में पेश किया गया।
दोपहर 01:00 बजे: कोर्ट ने निठारी कांड के आरोपियों मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को फांसी व जुर्माने की सजा सुनाई।
निठारी कांड के कुछ महत्वपूर्ण प्वाइंट:
- अभियोजन की ओर से इस मामले में कोर्ट के समक्ष कुल 46 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए थे।
- डिफेंस की ओर से भी तीन गवाहों ने अपने बयान विशेष सीबीआई कोर्ट में दर्ज कराए थे।
किन धाराओं में किसे मिली कितनी सजा, कितना जुर्माना
मोनिंदर सिंह पंधेर:
जुर्म======================================सजा
आईपीसी 302 (हत्या)===================फांसी और दस हजार रुपये का जुर्माना
आईपीएस 376/511 सहपठित धारा-120बी ======सात साल कैद और दस हजार रुपये जुर्माना
आईपीसी 201 (साक्ष्य नष्ट करना)============सात साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना
सुरेंद्र कोली:
जुर्म======================================सजा
आईपीसी 302 (हत्या) ==================फांसी और दस हजार रुपये का जुर्माना
आईपीसी 364 (अपहरण)================उम्र और दस हजार रुपये का जुर्माना
आईपीएस 376/511 (रेप का प्रयास)=========दस साल कैद और दस हजार रुपये जुर्माना
आईपीसी 201 (साक्ष्य नष्ट करना)==========सात साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना

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nithari case: surinder koli blamed court for not hearing his version after death sentence
- फोटो : अमर उजाला

कोली-पंधेर को फांसी की सजा मिलते ही खिले पीड़ित परिजनों के चेहरे
सीबीआई की विशेष अदालत ने जैसे ही मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई वैसे ही अदालत में बैठे पीड़ितों के चेहरे खुशी से खिल गए। निठारी कांड के अन्य मामलों के पीड़ित और मेड की मां भी सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत में पहुंची थी। वह सुबह 10 बजे ही अदालत में पहुंच गए और सजा सुनने का इंतजार करते रहे। दोपहर एक बजे जैसे ही अदालत ने कोली और पंधेर को फांसी की सजा सुनाई तो पीड़ितों के चेहरे पर न्याय मिलने की खुशी साफ झलकने लगी। दोषियों को मिलने वाली सजा सुनने के लिए सीबीआई विशेष अदालत पहुंची मेड की मां ने बताया कि अब जाकर उनकी बेटी को न्याय मिला है, जब उसके हत्यारों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कई डॉक्टर्स भी दोषी हैं, जिनकी सीबीआई जांच करे।

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- फोटो : अमर उजाला

कई वकीलों को भी दरकिनार कर कोली ने खुद की थी पैरवी
निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली ने मेड की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से लेकर अन्य वकीलों को दरकिनार कर खुद ही अपने केस की पैरवी की। सीबीआई कोर्ट में सुरेंद्र कोली ने मेड के मामले में 2014 से लेकर अब तक तीन वकीलों को दरकिनार कर दिया था। इसमें उसने सरकार की ओर से मिले न्याय मित्र को बदलकर, गाजियाबाद के वकील सुबोध त्यागी को अदालत से मांगा था। इसके बाद कोली ने सुबोध त्यागी को भी हटाने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। सुप्रीम कोर्ट के वकील रविंद्र गाड़िया को अपना केस लड़ने के लिए मांगा था। सुरेंद्र कोली ने बाद में सुप्रीम कोर्ट के वकील को भी अपने केस से हटाए जाने की अर्जी कोर्ट में दी और खुद ही अपने केस की पैरवी कर रहा था। कोर्ट में फैसला सुनने पहुंचे निठारी आरडब्लूए के पूर्व अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि 2006 में सबसे अधिक बच्चे गायब होने की शिकायत आरडब्लूए के पास ही आई थी, जिसके बाद पदाधिकारियों ने निठारी चौकी और सेक्टर-20 थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मेड के हत्यारों को फांसी की सजा मिलने से मृतकों को न्याय मिला है। बाकी मामलों में भी दोनों को फांसी की सजा होनी चाहिए।

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सजा सुनाए जाने से पूर्व सोमवार सुबह सजा पर बहस के दौरान सुरेंद्र कोली ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने केस को साबित नहीं कर सका है।

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