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निर्भया केसः शुक्रवार तड़के तीन बजे से ही जेल में शुरू हो जाएगी हलचल, इस तरह होगी दोषियों को फांसी

Wed, 18 Mar 2020 09:30 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 18 Mar 2020 09:30 PM IST
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Nirbhaya convicts will be hanged on Friday in tihar jail
निर्भया के दोषी - फोटो : Amar Ujala

शुक्रवार को निर्भया के दोषियों की फांसी को लेकर सबकी निगाहें तिहाड़ जेल में टिक गई हैं। तिहाड़ में पहली बार किसी भी मामले के चार दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाया जाएगा। तिहाड़ जेल नंबर तीन में बने फांसी घर में शुक्रवार तड़के तीन बजे से ही हलचल शुरू हो जाएगी। दोषियों को जगाने से लेकर उन्हें तैयार कर फांसी घर तक ले जाने का काम जेलकर्मी करेंगे। वहीं गुनाहगारों को फांसी पर लटकाने का काम जल्लाद करेगा। 


 

Nirbhaya convicts will be hanged on Friday in tihar jail
निर्भया कांड के दोषी - फोटो : अमअम

जेल के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जिस दिन दोषी को फांसी दी जाती है उसे तय समय से ढाई घंटे पहले जगा दिया जाता है। नहाने के बाद उसे नए कपड़े पहने के लिए दिए जाते हैं। उसके बाद दोषी को सेल से बाहर आहते के पास लाया जाता है। जहां पहले से ही जेल अधीक्षक, उप अधीक्षक, मेडिकल ऑफिसर, जिला उपायुक्त (राजस्व) व 12 सुरक्षाकर्मी व एक सफाईकर्मी मौजूद होते हैं। यहां पर उससे किसी के नाम कोई खत लिखने या फिर आखिरी इच्छा के बारे में दोबारा पूछा जाता है। दोषी के पास 15 मिनट का समय होता है। 

Nirbhaya convicts will be hanged on Friday in tihar jail
पवन जल्लाद - फोटो : अमर उजाला

उसके बाद दोषी के हाथ को पीछे से बांध दिया जाता है और यहां से 100 कदम दूर फांसी घर तक ले जाया जाता है। फांसी घर पहुंचने के बाद सीढ़ियों के रास्ते दोषी को उसकी छत पर ले जाया जाता है। जहां जल्लाद पहले से मौजूद होता है। जो दोषी को फांसी के तख्ते के पास ले जाता है। दोषी के चेहरे को काले कपड़े से ढक दिया जाता है और फिर उसके गले में फांसी का फंदा डाल देता है। साथ ही दोषी के पैर को रस्सी से बांध देता है। 

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Nirbhaya convicts will be hanged on Friday in tihar jail
पवन जल्लाद - फोटो : अमर उजाला

सारी प्रक्रिय पूरी होने के बाद जल्लाद इशारे में ही इस बात की जानकारी जेल अधीक्षक को देता है। जेल अधीक्षक घड़ी देखने के साथ तय समय होते ही रूमाल हिलाकर इशारा करता है। आदेश होते ही जल्लाद लीवर को खींच देता है। एक ही झटके में दोषी फांसी पर झूल जाता है। 

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तिहाड़ जेल

इसके करीब दो घंटे बाद मेडिकल अफिसर फांसी घर जाकर यह सुनिश्चित करता है कि फांसी पर झूले व्यक्ति की मौत हुई है या नहीं। मृत होने के बाद मेडिकल ऑफिसर सर्टिफिकेट जारी करता है। उसके बाद शव को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जाता है। जेल अधिकारियों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया में तीन घंटे का समय लगता है। 

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