16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में चलती बस में पैरामेडिकल की 23 वर्षीय छात्रा से छह दरिंदों ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसके साथ ऐसी बर्बरता की जिसने उसकी जान ले ली। आज इसी केस में सात साल बाद इंसाफ मिल गया है। निर्भया के सभी दोषियों को फांसी की सजा हो चुकी है और सात साल का इंतजार भी खत्म हो गया है।
जब 2012 में इस केस की जांच शुरू हुई थी तो छह दोषियों में राम सिंह को प्रमुख दोषी पाया गया था। हालांकि उसने अदालत के अंतिम फैसले से पहले साल 2013 में ही फांसी लगा ली थी। जानिए कौन था राम सिंह जिसने अदालत के अंतिम फैसले से पहले ही तिहाड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी और आज भी उसकी मौत पर कई सवाल खड़े होते हैं...
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nirbhaya case ram singh
- फोटो : सोशल मीडिया
मार्च 2013 में की आत्महत्या
जब केस की जांच शुरू हुई थी तो राम सिंह को इस मामले में मुख्य आरोपी बताया गया था। हालांकि मार्च 2013 में तिहाड़ जेल में राम सिंह की लाश मिली थी। पुलिस का कहना था कि राम सिंह ने खुद ही तिहाड़ में फांसी लगाई थी, लेकिन राम सिंह का परिवार हमेशा आरोप लगाता रहा कि उसकी हत्या की गई थी।
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राम सिंह पेशे से बस ड्राइवर था और वारदात वाली रात उस बस को वही चला रहा था, जिसमें निर्भया से दुष्कर्म हुआ था। बस ड्राइवर राम सिंह का घर दक्षिण दिल्ली के रविदास कैंप में था।
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राम सिंह के स्वभाव के बारे में बताते हुए उसके पड़ोसियों ने एक बार बताया था कि शराब पीना और झगड़ा करना राम सिंह के लिए आम बात थी। उसका परिवार लगभग 20 साल पहले राजस्थान से दिल्ली आया था। पांच भाइयों के परिवार में राम सिंह तीसरे नंबर पर था। स्कूल में दाखिला कराने के बावजूद उसने शुरुआती दौर में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।
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निर्भया गैंगरेप में सबसे पहले राम सिंह को ही गिरफ्तार किया गया था। राम सिंह ने अपने 16 दिसंबर की वारदात के बाद एक साक्षात्कार में डॉक्युमेंट्री बनाने वाली महिला से कहा था कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। उसने उस घटना के लिए 23 वर्षीय पीड़िता निर्भया को ही दोषी ठहराया था।