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Nirbhaya Case: वो अंतिम 11 दिन, जब फोटोग्राफर को देख भड़क गई थीं मां, निर्भया ने इशारों में कहा था-आने दो
Fri, 20 Mar 2020 09:41 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 20 Mar 2020 09:41 AM IST
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nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
वो 16 दिसंबर 2012 की काली रात थी। रात के करीब 11 बजे थे जब 23 साल की युवती को सफदरजंग अस्पताल में लाया गया था। वह बुरी तरह से घायल थी और खूब खून बह रहा था। वह रह-रह कर बेहोश हो रही थी और उसके पूरे शरीर पर उस ठिठुरती रात में सिर्फ एक कपड़ा लिपटा हुआ था। वह जैसे ही अस्पताल के एक वार्ड में पहुंची तुरंत उस कमरे के सभी पर्दे लगा दिए गए और नर्सों ने उसे अस्पताल की चादर से ढक दिया। इसके बाद कुछ डॉक्टर पहुंचे। निर्भया की जिंदगी के उन अंतिम 11 दिनों की कहानी जब वह सफदरजंग अस्पताल में भर्ती थी और कैसे डॉक्टर भी उसकी हिम्मत का लोहा मानने को हुए मजबूर।
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Nirbhaya Case
- फोटो : अमर उजाला
यह युवती थी निर्भया, जो 16 दिसंबर से लेकर अगले 11 दिनों तक सफदरजंग अस्पताल में ही रही, जब तक वह सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में नहीं चली गई। आज भी उसका इलाज करने वाले डॉक्टर उसे भूले नहीं हैं। वह कहते हैं कि वो पहला एक्स-रे था जिसने हमें उसके साथ हुई बर्बरता से काफी हद तक अवगत कराया। हमने निर्भया के पेट का एक बेसिक एक्स-रे किया था, जिसे देखकर हम चौंक गए थे क्योंकि उस रिपोर्ट में युवती की आंत ही नहीं दिखाई दी थी।
निर्भया की मां
- फोटो : ANI
डॉक्टर ने आगे बताया कि मैं ये समझ ही नहीं पा रहा था कि उसकी आंत को क्या हुआ। मुझे लगा था कि मशीन को या तो रिपेयर की जरूरत है या फिर मैं ही अंधा हो गया हूं। एक्स-रे में देखा गया कि निर्भया के शरीर में मुश्किल से दो-तीन इंच ही आंत बची थी जबकि सामान्य दशा में एक महिला के शरीर में 20-22 फीट लंबी आंत होती है। एक्स-रे रिपोर्ट आने के बाद तुरंत वरिष्ठ सर्जनों को बुलाया गया और युवती को सर्जरी के लिए ले जाया गया ताकि उसके आंतरिक घावों का भी परीक्षण किया जा सके। 17 दिसंबर की रात दो बजे तक लगातार तीन घंटे की लंबी प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों को पता चला कि पीड़िता का शोषण करते वक्त उसके शरीर से आंत ही निकाल ली गई थी।
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nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
सफदरजंग की ही एक महिलारोग विशेषज्ञ ने एक बार कहा था कि यह केस रेप केस से कहीं ज्यादा था। दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के मामलो में भी हम यही देखते हैं कि पीड़िता के नाजुक अंगों में चोटें आती हैं। यहां तक कि वे बहुत गंभीर दुर्बल करने वाली चोटें हैं। लेकिन ऐसा मामला जहां मरीज की पूरी आंत बाहर निकाली गई थी, ऐसा हमने पहले कभी नहीं देखा था, भले ही हमारे पास सबसे बड़ा स्त्री रोग विभाग हो।
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- फोटो : अमर उजाला
सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरीटेंडेंट रहे बीडी अथानी ने एक बार कहा था कि डॉक्टरों ने इंफेक्शन रोकने के लिए पांच सर्जरी की। यह एक जबरदस्त प्रयास था, इसीलिए जब हम उसे बचा नहीं पाए तो ऐसा शून्य छोड़ दिया। डॉक्टरों को आज भी निर्भया के लड़ने का जज्बा याद है। अस्पताल की नर्सें बताती हैं कि पहली सर्जरी के बाद ही वह अलर्ट हो गई थी और उसने अपने मोबाइल फोन और क्रेडिट कार्ड के बारे में पूछा था।