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'एक देश-एक जैसी विधानसभा': दिल्ली में जुटे छह राज्यों के अध्यक्ष, एआई खुद बताएगा कौन विधायक सदन में मौजूद

Tue, 27 Oct 2026 06:09 PM IST
अनुज कुमार आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 27 Oct 2026 06:09 PM IST
सार

दिल्ली में छह राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों की बैठक हुई, जिसमें विधायी प्रक्रिया को मजबूत करने पर मंथन किया गया। इस दौरान दिल्ली विधानसभा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिये विधायकों की सदन में मौजूदगी बताने पर विचार हुआ। साथ ही, 'विधायक श्री' और 'विधायक श्रीमती' जैसे लैंगिक रूप से तटस्थ संबोधन पर भी सुझाव दिए गए।

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meeting of assembly speakers from six states was held in Delhi
‘एक देश-एक विधानसभा’ की तैयारी शुरू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा में कौन-सा विधायक सदन में मौजूद है, इसकी जानकारी जुटाने के लिए अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की दिशा में विचार किया जा रहा है। साथ ही विधायिका की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियमों में बदलाव और जेंडर न्यूट्रल संबोधन जैसे सुझावों पर भी मंथन हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से गठित विधायी निकायों की नियम प्रक्रिया संबंधी समिति की दूसरी बैठक मंगलवार को दिल्ली में हुई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने की।

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बैठक के बाद प्रेसवार्ता में सतीश महाना ने कहा कि विधायी प्रक्रिया को सुदृढ़, सशक्त और प्रभावी बनाने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा जरूरी है। तकनीक में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, ऐसे में विधायी संस्थाओं के कामकाज में भी उसके अनुरूप बदलाव की संभावनाएं तलाशनी होंगी। इसी उद्देश्य से समिति का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि समिति की पहली बैठक मैसूर में हुई थी। अब दूसरी बैठक में नियमों को अधिक प्रभावी बनाने और अलग-अलग विधानसभाओं की बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने पर चर्चा की गई।
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विधायक श्री और विधायक श्रीमती जैसे संबोधन का सुझाव
बैठक में जेंडर न्यूट्रल भाषा के इस्तेमाल का सुझाव भी सामने आया। इसके तहत केवल 'ही' और 'शी' जैसे लैंगिक संबोधनों के बजाय 'विधायक श्री' और 'विधायक श्रीमती' जैसे संबोधनों पर विचार किया गया। इसका उद्देश्य विधायी कार्यवाही में संबोधन को लेकर अधिक समावेशी व्यवस्था की संभावनाएं तलाशना है। हालांकि, ये सुझाव हैं और इन्हें अंतिम रूप से लागू करने का फैसला अभी नहीं हुआ है।
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छह राज्यों की समिति, दूसरी विधानसभाओं से भी सुझाव
समिति में छह राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं। महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। सर्वाधिक सुझाव दिल्ली की तरफ से आए हैं। महाना ने कहा कि समिति केवल अपने सदस्यों के विचारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अन्य विधानसभाओं से भी उनकी बेहतर परंपराओं और कार्यप्रणाली के संबंध में सुझाव मांगे गए हैं। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष रखा जाएगा।


पक्ष और विपक्ष दोनों महत्वपूर्ण
महाना ने कहा कि पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। विधायी प्रक्रिया में दोनों की भूमिका को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ा जाएगा। बैठक में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता मौजूद रहे। कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर और हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया भी समिति से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों में शामिल हैं। नागालैंड के विधानसभा अध्यक्ष बैठक में शामिल नहीं हो सके।

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