राजधानी में अंधविश्वास का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएंगे। डाबड़ी इलाके में अंधविश्वासी ससुर ने भूत-प्रेत के साये और मनहूस होने के शक के चलते अपनी बहू व 22 साल की पोती को कई साल घर में बंधक बनाकर रखा।
अंधविश्वास के चलते जिंदा लाश बनी मां-बेटी, ससुर ने बनाया 4 साल तक बंधक
आरोपी ने बस जिंदा रहने भर के लिए दोनों को खाना मुहैया करवाया। बीमार होने पर उनका डॉक्टरी इलाज भी नहीं हुआ। मां-बेटी बस जिंदा लाश बनकर रह गई। कुपोषण का शिकार हुई दोनों महिलाएं मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के बाद बोलने में अक्षम हो गईं। दोनों की हालत के बारे में जब लोकल आरडब्ल्यूए को जानकारी मिली तो उन्होंने पुलिस थाने जाकर इसकी शिकायत की। एनजीओ की मदद से पुलिस ने बुधवार शाम को दोनों महिलाओं को घर से मुक्त कराकर डीडीयू अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अब जांच कराने की बात कर रहे हैं।
आरडब्ल्यूए सचिव संजय पोददार ने बताया कि दोनों महिलाओं को महावीर एंक्लेव पार्ट-2, ए-ब्लॉक से मुक्त कराया गया। महावीर मिश्रा (74), इसकी बहू कलावती मिश्रा (47) कलावती की बेटी दीपा (22) और एक बेटा रहते हैं। महावीर मिश्रा एमटीएनएल से लाइन मैन रिटायर हैं। फिलहाल पेंशन मिल रही है। इसके अलावा वह घर में ही छोटी से स्टेशनरी की दुकान चलाते हैं। करीब चार साल पहले कलावती के पति की बीमारी से मौत हो गई। इसके बाद महावीर का दूसरा बेटा भी बीमारी से मर गया।
शायद इसी वजह से महावीर को लगा कि उसकी बहू कलावती और पोती मनहूस हैं और उन पर भूतप्रेत का साया है। इसी के चलते उसने दोनों को घर में बंधक बनाकर रख लिया। दोनों को किसी रिश्तेदार से मिलने भी नहीं दिया गया। दोनों को घर से बाहर भी नहीं निकलने दिया गया।
इसके बाद मां-बेटी मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गई। बीमार होने पर डॉक्टर के पास ले जाने की जगह महावीर ने झाड़-फूंक कराने के अलावा पंडितों से इलाज करवाया। दोनों का चलना-फिरना और बोलना भी लगभग बंद हो गया। मामले की भनक जब क्षेत्रीय आरडब्ल्यूए को लगी तो सचिव संजय पोददार डाबड़ी थाने पहुंचे और दोनों के बंधक बनाए जाने की सूचना दी। फौरन घर पहुंचकर बेहद खराब हालत में पुलिस ने दोनों महिलाओं को मुक्त कराकर अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस महावीर व अन्य लोगों से बातचीत कर रही है।