बंदर ने लिया बदला, भाइयों के सामने गला दबाकर की हत्या
गाजियाबाद के पास मोरटा गांव में बृहस्पतिवार दोपहर बंदर ने गला
दबाकर एक विकलांग मासूम की जान ले ली। पिता, दादा और दादी नौकरी पर और मां
मायके गई थी। मूलरूप से मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना निवासी ईंट भट्टे के काम करनेवाले बबलू के चारों बच्चे कमरे में खेल रहे थे। (सभी फोटोः अमर उजाला/गाजियाबाद)
बंदर ने लिया बदला, भाइयों के सामने गला दबाकर की हत्या
इसी दौरान एक बंदर वहां आ गया। बच्चों ने बंदर को पत्थर मारकर भगा दिया।
थोड़ी देर बाद करीब 12 बजे बंदर फिर आया और सीधा कमरे में जा घुसा। इस पर
तीन बच्चे शोर मचाते हुए भाग गए, जबकि अपाहिज मोहन पलंग पर पड़े-पडे़
चीखता रहा। इसी दौरान बंदर ने पलंग पर चढ़कर मासूम का गला दबा दिया। बंदर
के जाने के बाद तीनों भाइयों ने मोहन को मरा देख शोर मचाया तो आसपास के लोग
इकट्ठे हो गए।
बंदर ने लिया बदला, भाइयों के सामने गला दबाकर की हत्या
बंदर को अंदर आया देख तीनों बच्चे शोर मचाते हुए भाग निकले, मगर अपाहिज
मोहन पलंग पर लेटा रह गया। हादसे में इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा
सकता है कि मोहन की मौत का कारण जुड़वां होना रहा। सोहन और मोहन जुड़वां
होने के कारण लगभग हमशक्ल हैं। इस घटना के बाद गांव में लोगों में बंदरों
को लेकर आक्रोश है।
बंदर ने लिया बदला, भाइयों के सामने गला दबाकर की हत्या
मूलरूप से मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना निवासी बबलू का
परिवार 15 साल से मोरटा में रह रहा हैं। परिवार में पिता ओमपाल, मां
बालेश, पत्नी शशि और चार बच्चे गोलू (8), श्रीकांत (6), जुड़वा मोहन एवं
सोहन (4) हैं। इनमें मोहन बचपन से ही विकलांग है। बबलू और ओमपाल ईंट भट्टे
पर काम करते हैं, जबकि बालेश एक स्कूल में चपरासी है। बबलू ने बताया कि
पत्नी छह दिन से दिल्ली स्थित मायके में है। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल की।
बंदर ने लिया बदला, भाइयों के सामने गला दबाकर की हत्या
मोदीनगर क्षेत्र का लाइन पार इलाका ऐसा है जहां बंदरों के डर से रिश्तेदार
फल ले जाना गंवारा नहीं समझते हैं। इस क्षेत्र में पिछले कई साल में बंदरों
के डर के कारण छत से गिरने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। बड़ी संख्या
में लोग बंदरों का शिकार हुए हैं। वर्ष 2014 में बंदरों से निजात दिलाने की
मांग को लेकर सभासदों ने मोर्चा भी खोला था।