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मोदीनगर अग्निकांड: फैक्टरी के गेट पर रखा शव और सड़क पर लेट गए मृतकों के आक्रोशित परिजन
Mon, 06 Jul 2020 09:48 AM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 06 Jul 2020 09:48 AM IST
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मोदीनगर अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद जिले के मोदीनगर के बखरवा गांव में हुए दिल दहला देने वाले अग्निकांड के पीछे पुलिस की नाकामी और लापरवाही सामने आ रही है, जिसके कारण हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। हादसे के बाद जहां एक तरफ मृतकों के परिजनों ने सड़क पर लेट कर एंबुलेंस का रास्ता रोका वहीं, मकानों की छतों पर जुटे ग्रामीणों ने भी पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कुछ पल के लिए हालात बेकाबू से होते दिखे, जिसके चलते देहात के साथ-साथ शहर के थानों के एसएचओ और अन्य अधिकारी भी मौके पर बुला लिए गए।
हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने घटना के बाद मृतकों के शव फैक्टरी के गेट पर रख दिए गए। पुलिस जब उन्हें पोस्टमार्टम के लिए ले जाने लगी तो ग्रामीण विरोध करने लगे। ग्रामीण चौकी इंचार्ज और थाना प्रभारी को तत्काल ही बर्खास्त करने की मांग पर अड़ गए। उनका कहना था कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाएगी वह शवों को नहीं उठने देंगे। हंगामा बढ़ता देख डीएम-एसएसपी ने मोदीपोन चौकी इंचार्ज को सस्पेंड करते हुए घटना के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों का कहना है कि उक्त अवैध फैक्टरी कई वर्षों से नितिन चौधरी के घर में चल रही थी। फुलझड़ी बनाने के लिए बारूद टीला मोड़ थाना क्षेत्र स्थित फर्रूखनगर से आता था। फैक्टरी चलाने का न तो लाइसेंस था और न ही फैक्टरी में आग से बचाव के कोई संसाधन थे। कच्चे माल के रूप में रखे बारूद ने आग पकड़ी तो लोगों को भागने का मौका भी नहीं मिला।
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हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के अनुसार अभी तक की जांच में सामने आया है कि पुलिस की सरपरस्ती में बीते एक वर्ष से अवैध फैक्टरी धड़ल्ले से चल रही थी। कुछ दिन पहले ही पुलिस ने उसका माल उठाया था। उसके बाद एक-दो दिन तक काम बंद रहा, लेकिन जैसे ही पुलिस के पास किस्त पहुंची तो जब्त किया सामान लौटा दिया गया। इसके बाद फिर से फैक्टरी के अंदर काम शुरू हो गया। स्थानीय लोगों ने बताया है कि हल्के के दरोगा से लेकर सिपाहियों तक का फैक्टरी में आना-जाना लगा रहता था। महीने में एक-दो बार शाम के वक्त लेबरों के जाने के बाद फैक्टरी में आरोपी नितिन और पुलिस पार्टी भी करते थे।
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भीड़ को संभाल कर गांव से बाहर भेजी गई एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस को लेकर ग्रामीणों में इस कदर आक्रोश था कि घटना के बाद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की कर दी गई। मौके की नजाकत भांपते हुए अधिकारियों ने सूझबूझ से काम लिया और मुश्किल से हालात संभालते हुए समूह को मोर्चरी भिजवाया। सड़क के दोनों तरफ पुलिस के जवानों को खड़ा कर एंबुलेंस को गांव से निकलवाया गया।