चुनाव जीतने के लिए पढ़ी-लिखी लड़की से कर दिया बेटे का ब्याह
हरियाणा के अति पिछड़े जिले मेवात के जिला मुख्यालय नूंह से होडल रोड पर करीब पांच किलोमीटर चलते ही हुसैनपुर गांव आता है। पंचायत चुनाव में यह सीट महिलाओं के लिए रिजर्व हो गई है। चुनाव में 10वीं पास होने की अनिवार्यता ने इस गांव में पढ़ी-लिखी लड़कियों और बहुओं की प्रतिष्ठा बढ़ा दी है। (फोटो व स्टोरी : ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव)
चुनाव जीतने के लिए पढ़ी-लिखी लड़की से कर दिया बेटे का ब्याह
यहां एक परिवार ने सरपंची का चुनाव लडऩे के लिए विशेषतौर पर अपने बेटे की शादी कर दी और दहेज में ली सिर्फ शिक्षा। गांव में घुसते ही फतेह मोहम्मद का घर आता है। पिछली बार वह एक वोट से सरपंच का चुनाव हार गए थे। हारने की कसक अब तक उन्हें सालती रहती है। इस घर का एक युवक अलीशेर बताता है कि हुसैनपुर और सतपूतयाका गांवों को मिलाकर एक पंचायत है। दूसरे गांव में दो-तीन महिलाएं और लड़कियां दसवीं पास हैं।
चुनाव जीतने के लिए पढ़ी-लिखी लड़की से कर दिया बेटे का ब्याह
लेकिन उनके चुनाव में खड़े होने के बारे में अब तक कोई शोर शराबा नहीं है। इसीलिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा की अनिवार्यता करने के बाद फतेह मोहम्मद ने अपने 21 वर्षीय बेटे अब्बास की शादी सिर्फ सरपंची का चुनाव जीतने के लिए जल्दी कर दी। अब्बास एक इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। उसकी शादी राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ तहसील के तहत आने वाले गांव चौमा की बीए पास फारुना से करवाई गई।
चुनाव जीतने के लिए पढ़ी-लिखी लड़की से कर दिया बेटे का ब्याह
उनकी बहू गांव में सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी है इसलिए वह निर्विरोध चुने जाने की भी उम्मीद लिए बैठे हैं। फतेह कहते हैं कि उन्होंने चुनावी जरूरत की वजह से पढ़ी-लिखी बहू खोजी। उनका कहना है कि हैसियत के हिसाब से शादी में लेनदेन चलता था लेकिन पंचायत चुनाव में शिक्षा अनिवार्य होने के बाद इसमें बदलाव आया है। अब जितनी भी शादियां तय हो रही हैं सबमें लोग पूछ रहे हैं कि लड़की कितनी पढ़ी-लिखी है।
चुनाव जीतने के लिए पढ़ी-लिखी लड़की से कर दिया बेटे का ब्याह
गांव के लोग बताते हैं कि एक किलोमीटर दूरी पर ही 10वीं तक का बहुत पुराना स्कूल है लेकिन अब तक लोग लड़कियों को वहां पढऩे भेजने से परहेज करते थे। हालांकि अब इस फैसले से बदलाव की बयार बहनी शुरू हुई है। पहले लोग लड़कियों को पांचवीं पढ़ाकर घर बैठा देते थे क्योंकि ज्यादा पढ़ाने पर शादी में ज्यादा लेनदेन करना पड़ता था। अब यह धारणा टूट जाएगी। क्योंकि लोग खुद पढ़ी-लिखी बहू खोज रहे हैं। -मो. आरिफ, टीम कोर्डिनेटर, रेडियो मेवात