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मिलिए उन महिलाओं से जिनकी धरती के साथ आसमान पर भी है हुकूमत

Tue, 08 Mar 2016 08:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 08 Mar 2016 08:45 AM IST
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Meet these womans who rule on earth with sky
महिला दिवस - फोटो : अमर उजाला

इंडिया रेप कैपिटल के नाम से बेशक दुनिया भारतीय महिलाओं की दयनीय हालत का आकलन करती हो, लेकिन देश की बेटियां मेट्रो, टैक्सी, हवाई जहाज, पुलिस, डॉक्टर से लेकर प्रशासनिक सेवाओं में अपनी पहचान बनाकर सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहीं हैं। बेटियां तो वर्षों से देश का नाम रोशन कर रही हैं, लेकिन पहली बार राजपथ पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौरे के दौरान दुनिया ने महिला सशक्तिकरण का निराला रूप भी देखा। देश की बेटियां आज सुरक्षा प्रहरी से लेकर हर क्षेत्र में अपनी मेहनत व काबलियत का लोहा मनवा रही हैं। इंटरनेशनल वूमन-डे पर अमर उजाला जांबाज व हौसलामंद हस्तियों से रूबरू करा रहा है, जो दुनिया समेत समाज की रूढ़िवादी सोच को नकारते और सफलता की बुलंदियों को छूते हुए देश की दूसरी और बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला दे रही हैं।

गार्ड ऑफ ऑनर देकर पूजा ने बनाया इतिहास

Meet these womans who rule on earth with sky
पूजा ठाकुर

एयरफोर्स अधिकारी के साथ-साथ मैं नौ साल की बेटी की मां भी हूं। अपनी बेटी की परवरिश ऐसे करूंगी कि वह दूसरी बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला व जरिया बने। अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद बेशक सेना में महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव का नजरिया महसूस किया हो, लेकिन यह भी सच है कि आधी आबादी के हालात अभी भी दयनीय हैं।

पिता के सहयोग से ही मैं भारतीय वायु सेना में जा सकी

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पूजा ठाकुर

हालांकि सशक्तिकरण से समाज में महिलाओं के प्रति आदर का भाव पैदा होगा। मेरे पिता सेना में अधिकारी थे और देश के कई शहरों के केंद्रीय विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और हर तरह के लोगों को जाना। पिता के सहयोग से ही मैं भारतीय वायु सेना में जा सकी पर हर बेटी को परिवार का साथ मिले, इसके लिए हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए।

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जस्सी आज हवा से बातें करतीं हैं

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पायलट जस्सी

सपने तो सभी देखते है, लेकिन उन्हें साकार करना बड़ी बात है। मोहाली के छोटे से कस्बे खरड़ की जस्सी आज कैप्टन है, हवा से बातें करतीं हैं और दस सालों से विमान में सुरक्षित सफर कर रहीं है। जब मैं 12 साल की थी तब से ही पायलट बनने की ठान ली थी। 8वीं में देखा सपना पूरा हुआ और कैप्टन बन गई। जस्सी का कहना है कई साथी इस फील्ड में आने से मना भी किए लेकिन मेरा विश्वास नहीं डिगा। लड़कियां हर वो काम कर सकतीं है जो चैलेंजिंग माना जाता है। अमर उजाला से अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कई बार यात्री यह कह बैठते हैं कि क्या महिलाएं विमान उड़ाएंगी वहीं अधिकतर लोग प्राउड फील करते हैं।

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जस्सी

विमान की लैंडिंग के समय जब एनाउंसमेंट होता है कि महिला क्रू मेंबर ही फ्लाइंग कर रही थी तो यात्रियों को खुशी होती है। गो एयर के साथ जुड़ी जस्सी कहतीं हैं कि महिला दिवस के दिन ज्यादातर वे उसी विमान में होती है जिसमें सिर्फ महिला क्रू मेंबर होती है। उन्होंने कहा कि एविएशन सेक्टर में पुरुषों की तादाद ज्यादा है। लेकिन भारत ही ऐसा देश है जहां इस पेशे में बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। पायलट मतलब पायलट होता है इसमें लड़की और लड़के का कोई भेद नहीं। कॉकपिट में दोनों मिलकर बेहतर काम करते हैं।

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