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मिलिए उनसे जिन्होंने जीता लाल दुर्ग, कहीं जश्न तो कहीं मायूसी

Sun, 13 Sep 2015 08:06 PM IST
Updated Sun, 13 Sep 2015 08:06 PM IST
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मिलिए उनसे जिन्होंने जीता लाल दुर्ग, कहीं जश्न तो कहीं मायूसी

Meet him who won the Red Fort

वामपंथियों के गढ़ कहे जाने वाले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के लाल दुर्ग में छात्रसंघ चुनावों में भगवा ने वापसी की तो लगातार तीन चुनाव जीत दर्ज करने वाली आइसा को झटका लगा है। जेएनयू छात्रसंघ चुनावों में अध्यक्ष पद पर एआईएसएफ, उपाध्यक्ष व महासचिव पद पर आइसा तो संयुक्त सचिव पद की सीट पर एबीवीपी को जीत मिली है। खास बात यह है कि चौदह साल केलंबे इंतजार के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी को सेंट्रल पैनल में संयुक्त सचिव की सीट मिली है। (सभी फोटो: अमर उजाला, नई दिल्ली)


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जेएनयू कैंपस में 11 सितंबर को आयोजित छात्रसंघ चुनावों का रिजल्ट रविवार को आया है। लगातार तीन सालों से सेंट्रल पैनल पर काबिज आइसा के लाल दुर्ग में भगवा ने सेंध लगा दी है। लगभग 53.33 फीसदी मतदाताओं ने अपने वोट से छात्रसंघ चुनाव में अपने मुद्दों पर प्रत्याशियों का चयन कर लिया है।

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एआईएसएफ ने चुनाव से पहले सभी वामपंथी छात्र संगठनों को एक बैनर तले (लेफ्ट प्रोग्रेसिव फ्रंट) से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन आइसा, डीएसएफ व एसएफआई के गठजोड़ न होने के चलते तीनों ने अलग-अलग बैनर से चुनाव लड़ा। हालांकि एआईएसएफ ने चुनाव में एकमात्र अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी खड़ा किया और जीत हासिल की।

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जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर एआईएसएफ के कन्हैया कुमार ने आइसा के विजय कुमार को 67 वोटों के अंतर से मात दी है। जबकि तीन सालों से सेंट्रल पैनल की सभी सीटों पर आइसा का परचम था।

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दूसरे आइसा के अध्यक्ष पद के दावेदार विजय कुमार स्कूल काउंसलर रह चुके थे और मतदाताओं के बीच अच्छी पकड़ थी। उपाध्यक्ष पद की विजेता आइसा की शेहला राशिद सोहरा ने एबीवीपी की वेलंटीना ब्रह्मा को 234 वोटों से हराया है। जबकि वेलंटीना को पूर्वोत्तर के सभी छात्रों का साथ मिला क्योंकि वह नॉर्थ-ईस्ट की एकमात्र प्रत्याशी थीं।

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