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डॉक्टर्स का कमाल: दुर्लभ सर्जरी से तीन दिन के नवजात को दी नई जिंदगी

Thu, 31 Mar 2016 10:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 31 Mar 2016 10:59 PM IST
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magic: by Rare surgery given to  new life of three days newborn
3 दिन के नवजात को दी नई जिंदगी - फोटो : जी पॉल/अमर उजाला, नई दिल्ली

इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों ने तीन दिन के नवजात की दुर्लभ सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है। सर्जरी के बाद उसे दो माह तक अस्पताल में ही भर्ती रखा गया। अब उसकी उम्र ढाई माह है। फरीदाबाद के नंगला रोड में रहने वाले निखिल सिंगला के पुत्र की नॉर्मल डिलीवरी फरीदाबाद के एक निजी नर्सिंग होम में हुई। जन्म के साथ ही नवजात के लिवर, किडनी, छोटी और बड़ी आंत शरीर में अपनी जगह से हटकर छाती में विकसित हो रहे थे।

magic: by Rare surgery given to  new life of three days newborn
सर्जरी - फोटो : जी पॉल/अमर उजाला, नई दिल्ली

जन्म के साथ ही नवजात के लिवर, किडनी, छोटी और बड़ी आंत शरीर में अपनी जगह से हटकर छाती में विकसित हो रहे थे। जीवन रक्षक उपकरण के सहारे नवजात को इलाज के लिए अपोलो अस्पताल लाया गया।  वहां के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ सुजीत के चौधरी ने बताया कि छाती में कई अंग विकसित होने के कारण नवजात का फेफड़ा भी दब रहा था। उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी।

magic: by Rare surgery given to  new life of three days newborn
रेयर सर्जरी - फोटो : जी पॉल/अमर उजाला, नई दिल्ली
लिहाजा, डॉक्टरों की टीम ने फौरन सर्जरी करने का निर्णय लिया। 8 जनवरी को बच्चे का जन्म हुआ और 11 जनवरी को बच्चे की सर्जरी की गई। तीन घंटे की सर्जरी कर सभी अंगों को उसी जगह पर प्रत्यारोपित किया गया। इन अंगों के लिए बाहरी आवरण भी अंदर तैयार करना पड़ा। 21 मार्च को नवजात को अस्पताल से छुट्टी दी गई।
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सर्जरी - फोटो : जी पॉल/अमर उजाला, नई दिल्ली
चिकित्सकों ने केस की गंभीरता को देखते हुए नवजात को करीब ढाई माह अस्पताल में भर्ती रखा। निपुण की मां नीतू ने बताया कि अब उनका बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। अपोलो अस्पताल की नियोनेटलॉजिस्ट डॉ विद्या गुप्ता ने कहा कि नवजात के लिए जन्म से 27 दिन तक समय बहुत मुश्किल वाला होता है।
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रेयर सर्जरी - फोटो : जी पॉल/अमर उजाला, नई दिल्ली

समय पूर्व जन्म लेने वाले 50 प्रतिशत बच्चे मौत के शिकार हो सकते हैं, यदि उनकी चिकित्सीय दिक्कतों को दूर नहीं किया गया। ऐसे बच्चों को छोटे अस्पताल से बड़े सेंटर तक ट्रांसपोर्ट करके लाना बड़ी चुनौती होती है। लिहाजा, यदि गर्भवती को किसी तरह की दिक्क्त हो तो डिलीवरी ही बड़े सेंटर पर करानी चाहिए। ताकि, बच्चे में किसी तरह की दिक्कत हो तो उसका सही इलाज वहां मिल पाए।

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