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दो हैवीवेट उम्मीदवारों के बीच फंसे मनोज तिवारी, जानिए उत्तर-पूर्वी दिल्ली सीट का पूरा गणित

Fri, 10 May 2019 02:53 PM IST
पूजा त्रिपाठी हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 10 May 2019 02:53 PM IST
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lok sabha elections 2019 know every statistics about north east seat of delhi each minute detail
- फोटो : Amar Ujala

राजधानी की हाईप्रोफाइल मानी जानी वाली उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट को तीन हैवीवेट नेताओं की उम्मीदवारी ने दिलचस्प बना दिया है। भाजपा-आप-कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे तीनों नेता हैविवेट होने के साथ-साथ समान रूप से ब्राह्मण और पूर्वांचली भी हैं। इसके अलावा इनमें से दो वर्तमान तो एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं। इस सीट को बरकरार रखने की कोशिश में जी-जान से जुटे भाजपा के मनोज तिवारी की किस्मत दलित और मुस्लिम वोटों (38.5 फीसदी)के बंटने पर टिकी है।

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- फोटो : अमर उजाला

अगर इन दो बिरादरी का वोट कांग्रेस की शीला दीक्षित और आप के दिलीप पांडे में से किसी एक केनाम पर एकजुट हुआ तो तिवारी की राह बेहद कठिन हो जाएगी। बहरहाल मुस्लिम बिरादरी में जहां कांग्रेस का ज्यादा प्रभाव नजर आता है, वहीं दलित और झुग्गी झोपड़ी के मतदाताओं में पांडे का आकर्षण महसूस किया जा सकता है। तीनों दलों से हैवीवेट उम्मीदवारों ने क्षेत्र के मतदाताओं को भी भ्रमित कर दिया है। दिल्ली की पूर्व सीएम होने के कारण शीला के प्रति सीलमपुर, मुस्तफाबाद में मुस्लिम बिरादरी का झुकाव नजर आता है।

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खेसारी यादव और मनोज तिवारी - फोटो : Amar Ujala

हालांकि बाबरपुर, मुस्तफाबाद में यह बिरादरी आप और कांग्रेस के बीच बंटी हुई है। इसी प्रकार तिमारपुर और सीमापुरी की झुग्गियों में आप का प्रभाव ज्यादा नजर आता है, मगर इन क्षेत्रों में भी कई मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर है। इस सीट से जुड़े 10 विधानसभा सीटों में एक ही बिरादरी केमतदाता पसंद और नापसंद के सवाल पर बंटे हुए हैं। बीते चुनाव की बात करें तो मोदी लहर में भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी ने पूर्वांचली मतदाताओं (25-28 फीसदी) के बूते कांग्रेस केकद्दावर नेता जयप्रकाश अग्रवाल को तीसरे नंबर धकेल दिया था। उन्हें ब्राह्मण, वैश्य, जाट, पंजाबी बिरादरी का भी खुल का साथ मिला था। हालांकि इस बार चूंकि तीनों ही हैवीवेट उम्मीदवार पूर्वांचल से ही हैं, ऐसे में तीनों पूर्वांचली मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए युद्घ स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में तिवारी के समक्ष मोदी का व्यक्तित्व और राष्ट्रवाद का ही सहारा है।

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Manoj Tiwari-Sheila Dxit - फोटो : Amar Ujala

पूर्वांचल वोटों पर जंग

शीला, तिवारी और पांडे तीनों इस सीट के 25 से 28 फीसदी पूर्वांचल के मतदाताओं को साधने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। बीते चुनाव में भाजपा के तिवारी को इसका खुल कर समर्थन मिला था। यही कारण है कि आप और कांग्रेस ने भी पूर्वांचल से जुड़े नेताओं को ही मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने इस सीट पर जयप्रकाश अग्रवाल की जगह पूर्व सीएम दीक्षित पर भरोसा जताया है। आप उम्मीदवार खुद के गाजीपुर से होने, भाजपा उम्मीदवार खुद के बनारस का होने और शीला खुद के कन्नौज से होने का प्रचार कर रहे हैं।

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आप कांग्रेस बीजेपी - फोटो : सोशल मीडिया

चुनाव के अहम मुद्दे

भाजपा- राष्ट्रवाद, विकास, हिंदुत्व, कार्यकर्ताओं की फौज
कांग्रेस- असहिष्णुता, जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी
आप- पूर्ण राज्य, दिल्ली सरकार के कामकाज में केंद्र की दखलअंदाजी

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