तस्वीरें: जानिए दुनिया में कहां- कहां कामयाब हुआ ऑड-ईवन
क्या आपने कभी कार-मुक्त शहरों की कल्पना की है- वाहनों के अविष्कार से पहले के समय की? क्या कारों का दौर अब ख़त्म होने के कगार पर है? दिल्ली और मुंबई की सड़कों पर ट्रैफिक की भीड़-भाड़ को देख कर तो ऐसा नहीं लगता लेकिन दुनिया के परिवहन विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने कार-मुक्त शहरों की कल्पना करनी शुरू कर दी है।
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पेरिस में 2020 तक डीजल कारों पर पूरी तरह से रोक लगाने की योजना है तो वहीं बीजिंग, पेरिस, बोगोटा और लंदन जैसे दुनिया के कई बड़े शहरों में ऑड-ईवन फार्मूला कार-फ्री शहर बनाने की तरफ कुछ छोटे मगर अहम कदम हैं। प्रदूषण से परेशान दिल्ली के नागरिकों को भी अब 1 जनवरी से 15 जनवरी तक ऑड-ईवन फार्मूला आजमाने का मौक़ा मिल रहा है। इस योजना को लेकर दिल्ली की जनता की राय बंटी हुई है।
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कोई कहता है कि जब तक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली बेहतर नहीं होगी ये योजना कामयाब नहीं होगी। दिल्ली
की आबादी एक करोड़ 70 लाख है. वाहनो की संख्या लगभग एक करोड़ है। इसके
इलावा अन्य राज्यों से हर दिन लाखों गाड़िया दिल्ली में प्रवेश करती हैं।
इन लोगों के मुताबिक़ ऐसे में इस स्कीम को कैसे लागू किया जा सकता है? कुछ दूसरे लोग कहते हैं कि दिल्ली की जनता ट्रैफिक नियमों का पालन ठीक से नहीं करती इसलिए ये स्कीम असफल हो जाएगी।
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कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस फॉर्मूले को लागू किए जाने के पक्ष में हैं।
दिल्ली सरकार कहती है कि अगर ये योजना कामयाब न रही तो इसे रद्द कर दिया
जाएगा। ये एक ऐसी कोशिश है जिसे दुनिया के कई बड़े शहरों में आजमाया
गया है। कुछ शहरों में अब भी इसे जरूरत पड़ने पर लागू किया जाता है। तो
क्या इससे इन शहरों में प्रदूषण कम हुआ? एक नजर ऐसे ही कुछ शहरों पर-
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बीजिंग- बीजिंग और दिल्ली दुनिया के दो सब से अधिक प्रदूषित शहर हैं। दिल्ली की तुलना बीजिंग से ही करना बेहतर है क्योंकि आबादी, गाड़ियों की संख्या और साइज के हिसाब से दिल्ली बीजिंग के बराबर हैं। बीजिंग में ऑड-ईवन फार्मूला पहली बार 2008 के ओलिंपिक खेलों के दौरान लागू किया गया। इसके अलावा दो और समय पर इसे लागू किया गया। नयी गाड़ियों की बिक्री पर भी पाबंदी लगायी गयी है।