फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जानें होली की मिठाईयों के पीछे का कड़वा सच, खरीदने से पहले जरूर पढ़ें ये जानकारी

Thu, 01 Mar 2018 04:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 01 Mar 2018 04:56 PM IST
विज्ञापन
know how sweets are made in shops, know before purchasing them
sweets

होली के त्योहार पर मिलावटखोरों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। मोटी कमाई के धंधे में यह मिलावटखोर लोगों की सेहत पर सीधे तौर पर हमला कर रहे हैं। मावा, घी, दूध, खाद्य तेल आदि सामान में मिलावट की जाती है। मिलावट भी ऐसी कि जल्दी से उपभोक्ता पहचान भी नहीं पाता। मिलावट के इसी दूध, घी मावे से मिठाइयां तैयार कर त्योहारी सीजन में खपा दी जाती हैं। जरूरत है कि उपभोक्ता संभल कर खरीदारी करे।

know how sweets are made in shops, know before purchasing them
sweets

सिंथेटिक पनीर :
शुद्ध पनीर सिर्फ गाय-भैंस के दूध से ही तैयार किया जा सकता है। त्योहार पर दूध की बढ़ती मांग के कारण मिलावटखोर सिंथेटिक पनीर तैयार करके उसे बाजार में खपाते हैं। सिंथेटिक पनीर को बनाने के लिए स्किम्ड मिल्क की बेकार व बची हुई सामग्री, गर्म पानी, सोडियम बाई कार्बोनेट (खाने वाला सोडा) और पाम ऑयल डालकर सिंथेटिक पनीर तैयार कर लिया जाता है।

know how sweets are made in shops, know before purchasing them
sweets

मिलावटी दूध 
दूध में खाने का सोडा, खराब मिल्क पाउडर, फार्मलीन, यूरिया और पानी मिलाकर इसकी मात्रा बढ़ा दी जाती है। इससे मिलावटखोर मुनाफाखोरी के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
know how sweets are made in shops, know before purchasing them
demo pic

मिलावटी मावा : 
शकरकंद और अरारोट से मिलावटी मावा तैयार करना अब गुजरे जमाने की बात है। वर्तमान में मिलावटखोर दो प्रकार का मावा बनाते हैं। एक को वनस्पति ब्रांड और दूसरे को सूखा पाउडर ब्रांड कहा जाता है। दूध से क्रीम निकालने के बाद वनस्पति घी या सूखा पाउडर मिलाया जाता है। मावे की महक के लिए इसमें हाइड्रो और पापड़ी नामक केमिकल का प्रयोग किया जाता है।

विज्ञापन
know how sweets are made in shops, know before purchasing them
demo pic

खाद्य सामग्री में किसी भी प्रकार की मिलावट सेहत के लिए नुकसानदायक होती है। केमिकल रंग का रिएक्शन पेट और त्वचा की बीमारी के साथ ही दिल की बीमारी का कारण बनते हैं। सिंथेटिक मावा, पनीर, दूध और खाद्य तेल का सेवन लीवर व किडनी को तो क्षतिग्रस्त करता है। इसके ज्यादा सेवन से रक्त धमनियों में खून का थक्का जमने का खतरा पैदा हो जाता है।’ - डा. सुखबीर सिंह, पीएमओ, बीके सिविल अस्पताल

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed