कैंपस में कन्हैया ने भाषण की शुरूआत में कहा कि....एक कहावत है बदनाम हुए तो क्या नाम नहीं हुआ.....? जेएनयू को बदनाम करने के लिए चैनलों के प्राइम टाइम पर जेएनयू को जगह देने वाले लोगों का धन्यवाद।
रिहा होते ही JNU में कन्हैया का भाषण, जानिए खास बातें
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किसी के लिए कोई दुर्भावना हमारे मन में नहीं है। खासकर एबीवीपी के लिए। हम लोग संवैधानिक लोग हैं। एबीवीपी पर टिप्पणी करते हुए कन्हैया ने कहा कि शिकार उसका किया जाता है जो शिकार करने लायक हो। सच में कह रहा हूं जेएनयू ने जो दिखाया जेएनयू जो सच कहने के लिए खड़ा हुआ है वो बड़ा काम है।
हमें इस देश की न्यायप्रक्रिया पर भरोसा है। हम बदलाव के पक्ष में है। जो संविधान की प्रस्तावना में लिखा है हम उसके साथ। मैं भाषण नहीं दूंगा मैं सिर्फ अपना अनुभव आपको बताउंगा। मैं पहले पढ़ता ज्यादा था सिस्टम को झेलता कम था। इस बार सिस्टम को झेला ज्यादा है।
प्रधानमंत्री जी से मेरा वैचारिक मतभेद है। मैं ये कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जी सत्यमेव जयते क्योंकि ये सत्यमेव जयते आपका नहीं है। हमारे संविधान के द्वारा हमें दिया गया है। हमारे यहां रेलवे स्टेशन पर एक जादूगर आता है वो कहता है जादूगर दिखाएगा जादू। नितिनिर्माता कहते हैं काला धन आएगा। हर-हर मोदी घर-घर मोदी।
कन्हैया ने कहा कि हम उसी भ्रष्टाचार, जातिवाद और भुखमरी से आजादी चाहते हैं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि बाबा साहब ने कहा कि राजनीतिक लोकतंत्र से काम नहीं चलेगा। हम सामाजिक लोकतंत्र लेकर आएंगे। हम इसलिए लड़ रहे हैं कि एक राष्ट्रपति का बेटा और एक चपरासी का बेटा एक ही स्कूल में पढ़ाई कर सकें।