सफदरजंग के हुमायूंपुर गांव में ऐतिहासिक इमारत को लेकर दिल्ली सरकार द्वारा दर्ज कर्रवाई गई पुलिस शिकायत के बाद से इलाके के लोगों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। ऐतिहासिक इमारत में रखी हुई भगवान की मूर्तियों को हटाने के संबंध में पुलिस शिकायत की खबर के बाद रविवार को गांव में लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा।
रातों-रात गुंबद को मंदिर में तब्दील करने के मामले ने पकड़ा तूल, हट सकती हैं भगवान की मूर्तियां
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मूर्तियों के हटाये जाने की संभावना के चलते स्थानीय लोगों ने सफदरजंग थाने में लिखित शिकायत दी है। हालांकि पुलिस अधिकारी शिकायत मिलने की बात से इंकार कर रहे हैं। हुमायूंपुर गांव निवासी दिलीप कुमार ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वह निगम पार्षद के साथ सफदरजंग थानाप्रभारी से मिले। उन्होंने थाने में लिखित शिकायत दी है।
इस शिकायत में कहा गया है कि गांव में दूसरी जगह एक गुंबद भी है और वहां पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इमारत का बोर्ड लगा है, लेकिन इस ऐतिहासिक इमारत के बाहर पुरातत्व विभाग का कोई बोर्ड है, ना कोई बाउंड्री है और ही कोई चौकीदार है। उन्होंने कहा कि अगर इमारत संरक्षित स्थल में आती है तो यहां पर कभी कोई सरकारी नुमाइंदा क्यूं नहीं आया।
शिकायत में कहा गया कि इस इमारत में बने मंदिर से दशकों से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए मामले की जांच में स्थानीय लोगों की भावनाओं का ख्याल रखा जाए। रविवार को लोग इस स्थल के आसपास काफी संख्या में जुटे हुए भी दिखाई दिए। गौतलब है कि इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हैरिटेज (इंटेक) के रिकॉर्ड्स के मुताबिक ऐतिहासिक इमारत करीब 600 साल पुराना तुगलक कालीन मकबरा है।
करीब दो महीने पहले इस ऐतिहासिक स्थल को स्थानीय लोगों द्वारा सफेद और केसरिया रंग से रंगा गया और भगवान की नई मूर्तियां स्थापित की गयीं। इमारत के केसरिया रंग से रंगे जाने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। इस स्थल में पहले से शिवलिंग और उनके परिवार समेत अन्य भगवान की मूर्तियां लगी हुई हैं। दिल्ली पुरातत्व विभाग द्वारा इस ऐतिहासिक स्थल से मूर्तियां हटाने को लेकर सफदरजंग थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई है।