हाई प्रोफाइल मर्डर हो या घोटालों के अभियुक्तों का बचाव। या फिर आय से अधिक संपत्ति के मामलों के अभियुक्तों को छुड़ाना। ये ऐसे वकील हैं जो हमेशा लहर के ख़िलाफ़ ही तैरते नज़र आए हैं। इनके कोर्टरूम में घुसते ही बड़े-बड़े वकील ही नहीं जज भी खौफ खाते हैं।
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इस बार भी वो चर्चा में हैं क्योंकि उन्होंने 94 साल की उम्र में भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ अदालत में मोर्चा संभाला है। इस उम्र में उनकी याद्दाश्त, सेंस ऑफ़ ह्यूमर और आक्रामक शैली में ज़रा भी कमी नहीं आई है।
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उनके पास वकालत का 77 साल का अनुभव है। यानी सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर जजों की उम्र जेठमलानी के अनुभव से उन्नीस पड़ती है। विवादों से उन्हें कभी परहेज़ नहीं रहा और देश के लगभग हर बड़े मामले में वकील या नेता के रूप में भूमिका रही है। सिर्फ 17 साल की उम्र में क़ानून की डिग्री लेने वाले राम जेठमलानी ने 13 साल की उम्र में ही मैट्रिक पास कर ली थी।
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शुरू से ज़हीन माने जाने वाले जेठमलानी ने अविभाजित भारत के कराची शहर के एससी शाहनी लॉ कालेज से क़ानून में ही मास्टर्स की डिग्री ली और जल्द ही उन्होंने अपनी 'लॉ फर्म' भी बना ली। कराची में उनके साथ वकालत पढ़ने वाले दोस्त एके बरोही भी उनके साथ 'लॉ फर्म' में थे। यह बात हो रही है विभाजन से पहले की। मगर जब भारत आज़ाद हुआ और विभाजन हुआ तो दंगे भड़क गए। अपने मित्र की सलाह पर जेठमलानी भारत चले आए।
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संयोग देखिए कि बाद में दोनों मित्र अपने अपने देशों के क़ानून मंत्री बने। वर्ष 1923 के 14 दिसंबर को सिंध के शिकारपुर में जन्मे राम जेठमलानी ने अपने करियर की शुरुआत सिंध में बतौर प्रोफ़ेसर की थी।