दिल्ली: महानगर की चकाचौंध से हार रहे युवा, पांच महीने में आठ लोगों ने मेट्रो के आगे कूदकर दी जान
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दिल्ली मेट्रो की विभिन्न लाइनों पर अप्रैल से अक्तूबर तक पिछले 5 महीने में आत्महत्या करने वालों का आंकड़ा 8 हो चुका है। हालांकि सुरक्षाकर्मियों व आम लोगों की जागरूकता के चलते 6 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है। दिल्ली मेट्रो पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन के आगे कूदकर जान देने वालों में युवा वर्ग अधिक है। नौकरी और पढ़ाई की भागमभाग का तनाव न झेल पाने के कारण उनकी उम्मीद टूट रही है।
वैसे इनमें सीनियर सिटीजन भी शामिल हैं। महानगरों में वे घर-बाहर की दिक्कतों को नहीं झेल पाने के कारण यह कदम उठाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आत्महत्या का ख्याल आने पर हर तनावग्रस्त व्यक्ति जान नहीं देता। मेट्रो ट्रेन के आगे आत्महत्या का रास्ता दर्द कम होने के लिए चुनते हैं। हालांकि यह सोच बिल्कुल गलत है। ऐसे कई मामले सामने हैं, जब ट्रेन के सामने कूदे लोगों की जान बच गई और उन्हें एक नए दर्द के साथ जीना पड़ रहा है।
सभी लाइन पर नहीं लग पाए हैं स्क्रीन डोर
प्रबंधन ने मेट्रो ट्रैक को आत्महत्या का ट्रैक बनने से रोकने के लिए एयरपोर्ट मेट्रो लाइन की तर्ज पर विभिन्न लाइनों पर स्क्रीन डोर लगाने की पहल 2016 में की थी। हुडा सिटी सेंटर से जहांगीरपुरी के बीच चलने वाली येलो लाइन पर अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर स्क्रीन डोर लगाए गए थे। इनका मकसद यात्रियों को सुरक्षित सफर देना और तनाव से परेशान यात्रियों का जीवन बचाना था। अब भी ब्लू लाइन, येलो, ग्रीन, वायलट व रेड लाइन के अधिकतर स्टेशनों पर स्क्रीन डोर नहीं लग पाए हैं। स्क्रीन डोर से ट्रैक और प्लेटफार्म के बीच एक कांच की दीवार रहती है। ट्रेन के प्लेटफार्म पर रुकने के बाद स्क्रीन डोर खुलता है। इसके आगे मेट्रो ट्रेन का दरवाजा होता है। इससे कोई भी यात्री ट्रैक के संपर्क में सीधे नहीं आ पाता।
तनावग्रस्त व्यक्ति से बात कर समस्या दूर करने में करें मदद
दिल्ली के प्रतिष्ठित गंगाराम अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता का कहना है कि जीवन में निराशा बढ़ने पर उम्मीद की कोई किरण नहीं दिखती। अत्यधिक तनाव होने पर आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता दिखता है। हर तनावग्रस्त व्यक्ति जीवन समाप्त नहीं करता। हालांकि कुछ लोग समस्याओं को नहीं झेल पाते हैं। ऐसे मरीजों को समय पर तनाव दूर करने में मदद मिले तो उनका जीवन बचाया जा सकता है। इसलिए कोई भी व्यक्ति तनाव में दिखे तो उससे दोस्ती के माध्यम से बातचीत करके समस्या का हल निकालने का प्रयास कर जीवन बचाया जा सकता है।