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बरसात के मौसम में कारगर है आयुर्वेद, ये 5 टिप्स रखेंगे हर बीमारी से दूर

Wed, 31 Jul 2019 04:50 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 31 Jul 2019 04:50 PM IST
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In rainy season ayurveda is helpful for health use these tips to be healthy
बारिश में खेलते बच्चे - फोटो : SP Singh

आयुर्वेद में ऋतुओं के हिसाब से खानपान और स्वास्थ्य रक्षण के तरीके वर्णित हैं। साल में छह ऋतु होते हैं। वर्षा ऋतु विसर्ग काल में आती है। विसर्ग काल वो होता है जिसमें हमारे शरीर की शक्ति धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। लेकिन वर्षा ऋतु के पहले 15 दिन रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कम होती है। साथ ही पाचन शक्ति (डायजेस्टिव पावर) भी कमजोर रहती है। इस समय विशेष ध्यान रखना पड़ता है। आगे जानिए कैसे खुद का ख्याल रखकर आप रह सकते हैं निरोग...

In rainy season ayurveda is helpful for health use these tips to be healthy
- फोटो : अमर उजाला

डॉ. पूजा कोहली, आयुर्वेदिक डॉक्टर एवं सह उपाध्यक्ष निरोग स्ट्रीट के अनुसार, बारिश के मौसम में मलेरिया, डेंगू, सदी, खांसी, उलटी, टाइफाइड, त्वचा रोग, पीलिया आदि रोग फैलते हैं। आयुर्वेद के सुझावों से हम खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। खाना आसानी से नहीं पचने से शरीर में बीमारियों के पनपने की संभावना रहती है। ऐसे समय में हमें हल्का खाना लेना चाहिए। बाहर का बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।

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water - फोटो : water

हमेशा ताजे फल, सब्जी और घर में बना ही खाना चाहिए। बासी खाने से बचे। पानी उबाल और छानकर पीना ज्यादा बेहतर होगा। गर्म पानी से शरीर में जितने भी दोष होते हैं वह दूर होते हैं और अग्नि की शक्ति धीरे - धीरे बढ़ती है। इससे हम जो भी आहार ग्रहण करते हैं, उसे पचने में कोई दिक्कत नहीं होती। इस मौसम में फंगल इंफेक्शन के खतरे भी ज्यादा होते हैं। रोज शरीर पर तेल लगाना चाहिए। प्रतिदिन  मुश्किल हो तो हफ्ते में एक बार नीम और तिल का मिक्स तेल जरूर लगाएं।

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बारिश में सूर्य बादलों से ढका रहता है। कपड़े सूखाने में दिक्कत होती है। हम ऐसे ही कपड़े पहनकर काम पर निकल जाते हैं। गीले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। ताकि फंगल या बैक्ट्रियल इंफेक्शन न हो। बारिश के मौसम में हल्की ठंड भी रहती है। गर्म पानी से नहाना सही रहता है। वात और बाकी दोषों का प्रकोप न हो। ऐसे में  आयुर्वेदिक दवाइयों के अलावा पंचकर्म थेरेपी की मदद ली जा सकती है। ‘स्नेहन’ और ‘स्वेदन’ के साथ ‘बस्ती’ थेरेपी करवाई जा सकती है। फायदा यह है कि यह वात के दोष को कम करता है। इस समय कुछ लोगों का पित्त भी बिगड़ा रहता है। 

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head massage
निम्न बातों का रखें ख्याल 
शरीर पर तेल की मालिश करें। 
उसके एक घंटे बाद गर्म पानी से नहाएं । 
हल्का गुनगुना पानी पीएं। 
ठंडा पानी नुकसान कर सकता है । 
हल्का भोजन करें ज्यादा तैलीय खाने से बचें । 
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