जिले में दोपहिया और चार पहिया वाहनों को पढे़ लिखे हर तबके के व्यक्ति दौड़ा रहे हैं। मगर जब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की बात आती है तो ऑनलाइन टेस्ट में करीब 40 फीसदी लोग फेल हो जाते हैं।
विशेष बात यह है कि यातायात से जुडे़ 9 नियम सही बताने पर ही टेस्ट पास हो जाता है। मगर यातायात के नियमों की पूरी जानकारी न होने के कारण लोग कई-कई बार परीक्षा देने के बाद ही डीएल बनवा पाते हैं। नोएडा में हर रोज 100 से 200 लोगों द्वारा लर्निंग डीएल के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। मगर ऑनलाइन व्यवस्था होने के कारण हर रोज 80 लोगों को ही लर्निंग टेस्ट देने के लिए बुलाया जाता है।
टेस्ट में 16 सवाल पूछे जाते हैं। करीब 35 से 40 फीसदी लोग होते हैं जो केवल 6 से 7 सवाल ही ठीक कर पाते हैं। जबकि पास होने के लिए कम से कम 9 सवालों के जवाब चाहिए। उसके बाद ही डीएल बनाया जाता है। अधिकारियों की मानें तो लोगों को विभाग की ओर से यातायात संबंधित नियमों की जानकारी के लिए पहले कार्यालय में लगे बोर्ड को पढ़वाया जाता है। जिससे उन्हें संकेतकों का ज्ञान हो सके। एमबीए, इंजीनियर और डॉक्टर तक ऑनलाइन टेस्ट में फेल हो जाते हैं।
73 संकेतकों की जानकारी जरूरी परिवहन विभाग की ओर से सामान्य 73 आदेशात्मक सड़क चिन्ह और सचेतक बनाए गए हैं। अगर व्यक्ति इन संकेतकों को याद कर ले अथवा पहचान ले तो हादसों में काफी कमी आ जाएगी। करीब 40 फीसदी लोगों में इन संकेतकों को पहचानने की क्षमता नहीं है। ऐसे ही लोग हादसों का शिकार होते हैं और दूसरों की जान भी लेते हैं।
लर्निंग डीएल बनवाने के लिए रोजाना 80 आवेदकों को ऑनलाइन स्लॉट मिलता है। इनमें से करीब 35-40 फीसदी लोग यातायात नियमों की जानकारी न होने के कारण फेल हो जाते हैं। जिन्हे दोबारा कार्यालय परिसर में बोर्ड पर चिन्हों को पढ़वाया जाता है। जिससे वह दोबारा परीक्षा में पास हो पाते हैं।- एके पांडेय, एआरटीओ प्रशासन, गौतमबुद्ध नगर