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हॉलीवुड निर्देशक चक रसेल ने खोला राज, फिल्म 'जंगली' से ही क्यों की हिंदुस्तानी सिनेमा में एंट्री

Wed, 27 Mar 2019 11:10 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 27 Mar 2019 11:10 AM IST
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hollywood director chak russell reveals why he entered in hindi cinema from movie junglee
चक रसेल और विद्युत जामवाल अमर उजाला के कार्यक्रम में हुए शामिल - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला की तरफ से देश के 180 जिलों में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता जंगली जॉयस के विजेताओं को पुरस्कार बांटने नोएडा आए मशहूर हॉलीवुड निर्देशक चक रसेल भारत की विविधताएं देखकर हतप्रभ हैं। चक ने अपनी पहली हिंदी फिल्म जंगली मार्शल आर्ट्स चैंपियन विद्युत जामवाल के साथ बनाई है। उनसे एक खास मुलाकात...



हिंदुस्तानी सिनेमा में बोहनी के लिए आपने फिल्म जंगली ही क्यों चुनी?
इसकी कहानी सुनते ही मेरे होश उड़ गए थे। हॉलीवुड में सुपरहीरो फिल्में खूब बनती हैं। मैंने भी ऐसी तमाम फिल्में बनाईं। शूटिंग और फिर पोस्ट प्रोडक्शन में सीजीआई और वीएफएक्स, इससे मैं ऊब गया। मैं एक रियल एक्शन फिल्म करना चाहता था और तभी मुझे ये कहानी सुनाई गई तो मैंने तुरंत हां कर दी।

टॉम क्रूज़जॉन ट्रैवोल्टाजिम कैरी और ड्वेन जॉनसन जैसे कलाकारों के बाद विद्युत जामवाल। कैसा रहा ये परिवर्तन?
विद्युत भी इसी लिस्ट में कहीं शामिल होता है। वह भी लार्जर दैन लाइफ कलाकार है। फिल्म की कहानी सुनने के बाद और स्क्रिप्ट लिखे जाने से पहले ही मैंने विद्युत से मुलाकात की। मैं अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट अपने हीरो की बॉडी लैंग्वेज और उसकी खासियतों के हिसाब से तैयार कराता हूं। मेरे काम करने का ढंग ही यही है। अगर फिल्म स्कॉर्पियन किंग में कोई और कलाकार होता तो शायद ड्वेन जितना अच्छा नहीं कर पाता। विद्युत भी उम्दा कलाकार होने के साथ साथ सारे स्टंट खुद करता है। पूरी फिल्म में हमने कहीं भी डुप्लीकेट या बॉडी डबल्स इस्तेमाल नहीं किया है।

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चक रसेल और विद्युत जामवाल से मिले बच्चे - फोटो : अमर उजाला

आप कहते हैं कि आप भारतीय संस्कृति से बहुत प्रभावित हैं और इसकी विविधता को जंगली में दिखाना चाहते हैं। फिर फिल्म को इंडोनेशिया में क्यों शूट किया गया? 
ये सिर्फ और सिर्फ हाथियों को ध्यान में रखते हुए किया गया। मेरी रिसर्च टीम ने इस फिल्म पर बहुत दिनों तक काम किया है। भारत में हाथियों के साथ शूटिंग करना आसान नहीं था वहीं मुझे थाइलैंड के एक एलीफैंट सेंटर की जानकारी थी। इसलिए मैं मैं सबको वहां ले गया। हाथियों को ख्याल रखने के साथ साथ मुझे फिल्म के कलाकारों और यूनिट की सुरक्षा का भी ध्यान रखना था।
 

तो क्या संदेश देती है आपकी फिल्म जंगलीभारत में इससे पहले हाथी मेरे साथी, मैं और मेरा हाथी जैसी फिल्में देख चुके लोगों को इसमें क्या नया देखने को मिलेगा?
मेरी फिल्म के हाथी फिल्म की सजावट के लिए नहीं हैं। जिन फिल्मों का आपने जिक्र किया ये इसीलिए हिट रहीं क्योंकि इसमें इंसान और जानवर की दोस्ती पर फोकस किया गया। जंगली इससे दो कदम आगे जाती है। यहां परेशानी में इंसान नहीं जानवर है। मैने हाथियों को भी कलाकारों की तरह ही दिखाया है। मेरी फिल्म का मकसद लोगों में जानवरों के प्रति सहानुभूती जगाना है। पूरी शूटिंग के दौरान हाथियों और विद्युत के बीच अच्छी खासी दोस्ती भी हो गई थी। इस दोस्ती का असर आपको परदे पर भी दिखाई देगा। फिल्म की हीरोइन पूजा सावंत तो शूटिंग खत्म होने के बाद इन हाथियों से बिछड़ने के गम में वहीं रोने लगी। दर्शकों को भी इस फिल्म में कई बार ऐसा ही एहसास होगा।

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