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निर्भया कांडः 40 साल पहले रंगा-बिल्ला को फांसी पर चढ़वाने के लिए भी हुआ था आंदोलन, यह था मामला

Thu, 12 Dec 2019 12:49 AM IST
Vikas Kumar आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 12 Dec 2019 12:49 AM IST
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history of ranga billa hanged
Ranga Billa - फोटो : Social Media

तब सोशल मीडिया तो था नहीं। बस एक-दूसरे से कहकर ही आंदोलनों को आगे बढ़ाया जाता था। रोज दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र और दिल्ली के लोग प्रदर्शन करते थे कि रंगा-बिल्ला को फांसी दी जाए, क्योंकि 1978 में दिल्ली वालों को रंगा-बिल्ला की हैवानियत ने झकझोर दिया था। अब जब निर्भया के दोषियों को फांसी देने की तैयारियों पर चर्चा हो रही है, तो आज से 40 साल पुराना आंदोलनों का वो दौर याद आ रहा है। यह कहना है उस वक्त रामजस कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष धर्मपाल शर्मा का। जो संजय और गीता के कातिल रंगा और बिल्ला को फांसी पर चढ़वाने के लिए कॉलेजों के कैंपस से लेकर सड़कों तक आंदोलन करते थे।


 

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चश्मदीद धर्मपाल शर्मा - फोटो : Amar Ujala

धर्मपाल शर्मा ने अमर उजाला से 40 साल पुराना वाकया साझा करते हुए कहा कि मुझे वह 1978 के सितंबर की सुबह याद है जब मैं तैयार होकर अपनी बाइक को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने बने एक होटल से मोड़ रहा था। दो लंबे-चौड़े लोगों से मेरी बाइक छू गई। उन लोगों ने मुझसे झगड़ा शुरू कर दिया। होटल मालिक परमानंद गुप्ता ने बीच बचाव किया और मैं निकल गया। कॉलेज में पहुंचकर रंगा और बिल्ला को फांसी पर चढ़ाने के लिए आंदोलन करने लगा। बाद में जब रंगा और बिल्ला पकड़े गए तो उनकी अखबारों में छपी फोटो देखकर पता चला कि जिन दो लोगों से मेरा झगड़ा हुआ था वे तो रंगा और बिल्ला ही थे। बाद में पुलिस ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की तंग गलियों में बने उस होटल को सील भी कर दिया। वह याद करते हुए कहते हैं कि उन दिनों पूरी दिल्ली में लोगों में निर्भया मामले जैसा ही गुस्सा था। लोगों की मांग थी कि रंगा और बिल्ला को फांसी दी जाए। अंतत: एक लंबी लड़ाई के बाद रंगा और बिल्ला को फांसी पर लटका दिया गया। 

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nirbhaya case - फोटो : सोशल मीडिया

आज भी याद है वह खौफनाक मंजर
धर्मपाल शर्मा कहते हैं कि मुझे आज भी वह खौफनाक मंजर याद है कि कैसे पूरी दिल्ली इकट्ठा होकर अपनी बच्ची के लिए लड़ाई लड़ती थी। दिल्ली की अब तक की सबसे हैवानियत भरी घटनाओं में यह ऐसी पहली घटना थी, जब पूरी दिल्ली ने आरोपियों को फांसी पर लटकाने के लिए लड़ाई लड़ी थी। वह कहते हैं कि रंगा-बिल्ला मामले के बाद निर्भया मामले में देशभर में बड़ा आंदोलन उठा। वह चाहते हैं कि जल्द ही निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटका दिया जाए।

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ranga billa case - फोटो : Social Media

यह था रंगा-बिल्ला केस
मामला चार दशक पहले 1978 का है। आर्मी अफसर के बच्चे गीता और संजय ऑल इंडिया रेडियो में एक कार्यक्रम के सिलसिले में जा रहे थे। गोल डाकखाने के पास 26 अगस्त, 1978 को लिफ्ट देने के बहाने रंगा और बिल्ला ने उन्हें कार में बिठा लिया। बाद में दोनों बच्चे जब वापस नहीं आए तो शिकायत दर्ज हुई। तीन दिन बाद 29 अगस्त को दोनों बच्चों की डेडबॉडी मिली। उसमें पता चला कि गीता की हत्या से पहले रेप किया गया था। पता चला कि रंगा-बिल्ला नाम के दो लोगों ने यह हैवानियत की थी। पुलिस ने दोनों को 8 सितंबर, 1978 को ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया था। बाद में दोनों को 31 जनवरी 1982 को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

...और बंद हो गया केस नंबर 465/78
इस मामले में सबसे पहले शिकायत मंदिर मार्ग थाने में आई थी। उसके बाद जब डेडबॉडी राजेन्द्र नगर थाने के इलाके में बरामद हुई तो केस को उसी थाने में ट्रांसफर कर दिया। लंबी लड़ाई के बाद जब 31 जनवरी, 1982 को रंगा-बिल्ला को फांसी पर लटका दिया गया, उसके बाद केस नंबर-465/78 की फाइल को पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

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