जिस जिले में खनन माफिया ने डीएसपी की कुचल कर हत्या कर दी, वहां खनन विभाग का कोई कार्यालय ही नहीं है। नूंह का खनन अधिकारी गुरुग्राम में बैठता है। इस पर भी खास बात यह है कि गुरुग्राम और नूंह जिले में खनन रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ तीन इंस्पेक्टरों के भरोसे है। इनमें भी दो इंस्पेक्टर अनुबंध के आधार पर डीसी रेट के हिसाब से भर्ती किए गए हैं। यही कारण है कि 20 साल पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बंद हुए खनन को रोक पाने में विभाग पूरी तरह से नाकाम है।
हैरान ना हों, सच यही है: जिस जिले में हुई डीएसपी की हत्या, वहां खनन विभाग का कार्यालय ही नहीं, एक बात ये भी
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विभाग की ओर से दो इंस्पेक्टरों को अनुबंध के आधार पर रखा गया है, जिनकी हर साल मंजूरी लेनी होती है। सरकारी स्तर पर सिर्फ एक ही इंस्पेक्टर इस विभाग में तैनात है। ऐसे में खनन की सूचना पर विभाग की टीम जब तक मौके पर पहुंचती है तब तक आरोपी फरार हो जाते हैं। वजह यह है कि इतने कर्मचारी ही नहीं हैं, जो सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंच सकें। इसके बाद तो खनन विभाग की ओर से थाने में एफआईआर दर्ज करा खानापूर्ति कर दी जाती है।
गांव के भीतर किसी की जाने की हिम्मत नहीं होती है। जो गांव रडार पर है उसमें रेहना, धुलावट, पंचगाव, सलाका, मलाका, चहलका, बड़कालमूद्दीन, खानपुर, मरोला, पल्ला, टपकड़, बरका, बसई, सीलखोर, मेवली आदि शामिल हैं।
विभाग की ओर से अवैध खनन रोकने के लिए सघन जांच की जाती है। स्टाफ की कमी के कारण त्वरित और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। खाली पदों पर नियुक्ति को लेकर समय-समय पर मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही यहां कुछ नए इंस्पेक्टर तैनात किए जाएंगे। - अनिल कुमार अटवाल, जिला खनन अधिकारी, गुरुग्राम।