दिल्ली के फराशखाना इलाके में इमारत गिरने से मृत चार साल की बच्ची खुशी का अगले महीने जन्मदिन था। इसको लेकर परिवार में खुशी का माहौल था। परिवार के लोग अपने अपने तरीके से इकलौती बेटी का जन्मदिन मनाना चाहते थे। लेकिन रविवार को इनकी खुशी को किसी की नजर लग गई। अपनी बातों और चुलबुली अंदाज से सभी के चेहरे पर मुस्कान देने वाली खुशी सभी को रूलाकर चली गई।
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मलबे के ढेर में तब्दील घर
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परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। जहां खुशी की मौत हुई है। वहीं उसके पिता सुखवीर के पैर में ऐसा जख्म हुआ कि उसके पैर को काटना पड़ा है। खुशी के चचेरे भाई वीरू ने बताया कि उसके पिता सात भाई हैं। सातों भाईयों के बच्चों में खुशी ही इकलौती बेटी थी। राखी और भाई दूज में सभी भाई खुशी के पास आते थे। खुशी को याद करते हुए वीरू की आंखों में आंसु आ गए।
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मलबे के ढेर में तब्दील घर
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उसने बताया कि खुशी की किसी बात की परिवार के सदस्य नजरअंदाज नहीं करते थे। घटना के समय खुशी के पिता दूध लेने के लिए जा रहे थे। खुशी ने भी अपने पिता के साथ जाने की बात कही। पिता उसे अपने साथ ले गए।
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खुशी को यादकर रोती महिला
- फोटो : अमर उजाला
बताया जा रहा है कि जब वह उस इमारत के सामने से निकल रहे थे, तभी मकान का मलबा सामने में गिर गया और खुशी के सिर में गंभीर चोट लगी।
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मलबा हटाती टीम
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जबकि मलबा का एक बड़ा हिस्सा गिरने से सुखवीर गंभीर रूप से घायल हो गया। लोगों ने दोनों ने उसे बाहर निकाला और अस्पताल लेकर गए। लेकिन खुशी को नहीं बचाया जा सका। सोमवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद खुशी के शव का अंतिम संस्कार किया गया। खुशी की मां पूनम ने बताया कि सुखबीर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। ऐसे में अब परिवार चलाने वाला कोई नहीं है।