गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में कक्षा 11 के छात्र सूर्या चौहान (17) की बकरीद के दिन चाकू घोंपकर हत्या करने के आरोपी असद का परिवार उसका अंतिम संस्कर पैतृक गांव महुआखेड़ा में ही करना चाहते थे। मगर जैसे ही गांव के लोगों को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने उसके गांव में अंतिम संस्कार किए जाने का विरोध किया। जिसके बाद परिवार के लोगों को असद का गाजियाबाद में ही अंतिम संस्कार कर ना पड़ा। शनिवार की रात में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में असद की मौत हो गई थी। असद के चाचा आबिद ने बताया कि जैसा उसने किया ऊपर वाले ने उसे वैसी ही सजा दे दी।
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असद के पिता व अन्य आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
20 साल पहले असद के पिता ने छोड़ दिया था गांव
असद के पिता मूलरूप से नरसेना थाना क्षेत्र के गांव महुआखेड़ा के निवासी थे। परिवार के लोगों, ग्रामीणों ने बताया कि असद के पिता नवाब करीब 20 वर्ष पहले गांव छोड़कर परिवार सहित गाजियाबाद के खोड़ा में रहने लगे थे। पोस्टमार्टम कार्रवाई के बाद पुलिस ने असद के शव को गांव महुआखेड़ा निवासी उसके चाचा आबिद व अन्य परिजनों को सौंप दिया था।
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आरोपी असद की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव में असद को लेकर नाराजगी
परिजनों के अनुसार छात्र की चाकू घोंप कर की गई हत्या को लेकर गांव में घटना को लेकर नाराजगी थी। चाचा आबिद ने बताया कि वह असद का पैतृक गांव में ही अंतिम संस्कार करना चाहते थे लेकिन ग्रामीणों ने गांव में असद के शव को दफनाने का विरोध किया और गांव में अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों के इनकार करने पर उन्होंने असद का गाजियाबाद के कब्रिस्तान में दफनाया गया।
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खोड़ा स्थित नवनीत विहार निवासी छात्र सूर्या का शव घर पहुंचने के बाद देखतीं उनकी मां सरोज ठाकुर।
चाचा बोले- जैसा किया, ऊपर वाले ने उसे वैसी ही सजा दी
परिजनों ने कहा कि असद ने गलत रास्ता चुना था और उसे अपने कर्मों की सजा मिली। आबिद ने कहा कि असद को ऐसा नहीं करना चाहिए था। कोई बात थी तो उसे बैठकर निपटा सकते थे या अपने बड़ों को बता सकते थे। जो कृत्य उसने किया वह माफ करने लायक नही हैं। उसने जैसा कृत्य किया, ऊपर वाले ने उसे वैसी ही सजा दे दी। घटना के बाद गांव में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं बनी हुई हैं।