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मुरादनगर हादसा: मौत से तो बच गए, लेकिन टूट गए पैर और कूल्हा, अब कहीं नहीं मिल रहा इलाज

Thu, 07 Jan 2021 10:55 AM IST
प्राची प्रियम राहुल सक्सेना, गाजियाबाद
राहुल सक्सेना, गाजियाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 07 Jan 2021 10:55 AM IST
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Story of Nirmal who survived during Muradnagar Creamatorium Hadsa
मुरादनगर हादसे में घायल निर्मल - फोटो : अमर उजाला
मुरादनगर के श्मशान घाट में हुए दर्दनाक हादसे में कई लोगों ने जान गंवा दी। इससे उनके परिजनों में शोक व्याप्त है ही, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो हादसे में मौत के मुंह से भले ही बच गए हों, लेकिन अब उनकी जिंदगी मौत से भी बदतर हो गई है। बिना किसी गलती के उन्हें ऐसी सजा मिली है कि अब दो वक्त की रोटी कमा पाना भी मुश्किल है। ऐसा ही कुछ हुआ है संगम विहार निवासी निर्मल के साथ...


 
Story of Nirmal who survived during Muradnagar Creamatorium Hadsa
संगम विहार में पसरा मातम - फोटो : कुमार संजय
निर्मल के दो पैर, कूल्हा टूटने के बाद पैसे के अभाव में एक निजी अस्पताल ने इलाज करने से मना कर दिया। परिजन जिला अस्पताल में लेकर पहुंचे तो वहां प्राथमिक उपचार के बाद टूटे हुए पैरों के साथ पीड़ित को घर भेज दिया गया। पूरे सिस्टम के सामने निर्मल इलाज के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन अधिकारी एंबुलेंस का आश्वासन देकर उसे छोड़कर जाते रहे। यही हाल कई अन्य लोगों का है। 

 
Story of Nirmal who survived during Muradnagar Creamatorium Hadsa
मलबे के नीचे दबे लोग - फोटो : अमर उजाला
संगम विहार कॉलोनी निवासी निर्मल भी रविवार को जयराम के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। वह भी छत के नीचे दब गए। उनके दोनों पैर, कूल्हा और दांत टूट गए व शरीर के कई अन्य हिस्सों में काफी चोट आई है। उन्हें मुरादनगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिन्हें बिना पैसे के उपचार दिए रेफर कर दिया। वह रविवार रात 12 बजे तक तड़पते रहे। वहां से किसी तरह परिजन उन्हें  जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। 

 
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Story of Nirmal who survived during Muradnagar Creamatorium Hadsa
मुरादनगर हादसा - फोटो : अमर उजाला
उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद दोनों टूटे हुए पैरों के बाद घर भेज दिया। सोमवार से निर्मल जो भी अधिकारी उनके पास जा रहा है, उससे इलाज के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने बताया कि उनके आगे पीछे कोई नहीं है। वृद्ध माता-पिता है, जिनका वह इकलौता सहारा है। मजदूरी करके उनका पेट पाल रहे थे। 

 
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Story of Nirmal who survived during Muradnagar Creamatorium Hadsa
मुरादनगर हादसा - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि मुझे मौत से बड़ा दर्द मिला है। मैं जिंदगी भर कुछ नहीं कर पाऊंगा। माता पिता की मौत के बाद मुझे रोटी भी नहीं मिलेगी। सरकार इतना कर दे जब तक जिंदा रहूं दो वक्त की रोटी मिल जाए। बैठे हुए का कोई काम मिल जाए या इतना मुआवजा मिल जाए कि रोटी मिल सके।
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