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गाजियाबादः नहीं खोलते छोटे पाइप तो जातीं कई और जानें, सीवर से निकलने का रास्ता था बंद

Fri, 23 Aug 2019 11:22 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 23 Aug 2019 11:22 AM IST
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ghaziabad 5 sanitation workers death many more have died as exit way from sewer was closed
sewer death - फोटो : अमर उजाला

सीवर का कार्य कर रहे लोगों को गैस के बारे में जानकारी नहीं थी। सीवर से निकल रहे पाइप भी बंद थे। इस कारण सीवर हॉल के अंदर गैस बनने लगी थी। जागरूकता के अभाव में एक के बाद एक व्यक्ति उसमें घुसता रहा और उसकी मौत होती रही। यदि कालोनी के लोग थोड़े जागरूक न होते तो कई और लोगों की जानें जा सकती थीं।

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sewer death - फोटो : अमर उजाला

स्थानीय लोगों ने बताया कि सीवर से निकल रहे पाइप बंद थे। सीवर हॉल के आधे हिस्से पर ढक्कन रखा हुआ था, जिस कारण उसके अंदर गैस बन रही थी। जो भी उसमें जा रहा था, मूर्छित होकर गिर रहा था। उन्होंने बताया कि पांच लोगों के बेहोश होने के बाद कुछ लोगों ने बंद पाइपों को खोला। वहां से गैस पास होने के बाद अंदर घुसकर लोगों को बाहर निकाला गया।

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नंदग्राम में सीवर मे काम करते हुए पांच लोगों की मोत के मौके पर पहुंचे निगम के जीएम वीके सिंह - फोटो : अमर उजाला

अफसरों के बद इंतजाम ले रहे लोगों की जान 
गाजियाबाद जल निगम, नगर निगम और नगर पालिकाओं की बद इंतजामी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। नंदग्राम के कृष्णा कुंज में बृहस्पतिवार को सीवर मैनहोल में हुआ हादसा इसका ताजा गवाह है। इससे पहले भी खोड़ा, लोनी, विजयनगर और हापुड़ में ऐसे कई ऐसे हादसे हो चुके हैं। सात साल में ऐसे हादसों में 50 से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इन घटनाओं के बाद भी सरकारी अफसरों ने सबक लेकर इन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया। 

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- फोटो : अमर उजाला

मौके पर नहीं था कोई इंजीनियर
गाजियबाद। सीवर मैनहोल से चैंबर को जोड़ने का जहां काम चल रहा था, वहां न तो जल निगम का कोई इंजीनियर मौजूद था और न ही कर्मचारियों को सेफ्टी उपकरण दिए गए थे। मृतकों के साथ काम कर रहे मजदूर जितेंद्र यादव का कहना है कि काम कर रहे कर्मचारियों के पास न तो मास्क थे और न ही गैस से बचने के लिए सेफ्टी उपकरण। सीवर मैनहोल में जाते वक्त उनके पास सिर्फ एक गमछा था। उससे उन्होंने नाक को ढक लिया था, लेकिन इससे वह गैस के प्रभाव से नहीं बच सके। आरोप है कि ठेकेदार की फर्म के पास उपकरण हैं, लेकिन उसने कर्मचारियों को नहीं दिए।

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- फोटो : अमर उजाला

सीवर और सेप्टिक टैंक में पूर्व में हुए हादसे 
जुलाई 2018: लोनी में मेन पंपिंग स्टेशन में सफाई करने उतरने तीन लोगों की दम घुटने से मौत। 
सितंबर 2018: लोनी के ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र में अचार फैक्ट्री के टैंक में उतरे पिता-पुत्र समेत तीन की मौत। 
जून 2019: खोड़ा में सेप्टिक टैंक में गिरने से 8 साल की बच्ची रुकसार बानो की मौत। 
20 जुलाई 2019: हापुड़ में सीवर लाइन सफाई करते समय तीन कर्मचारियों की दम घुटने से मौत। 

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