यूपी के जिला बुलंदशहर के शिकारपुर के गांव ढूंसरी निवासी कुख्यात बदमाश बलराज के अपराध की दुनिया में कदम रखने की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। (सभी फोटोः लाल सिंह/राजन राय/बुलंदशहर ब्यूरो)
फिल्मी है बलराज भाटी के गैंगस्टर बनने की कहानी, तालाब से मछली पकड़ने पर शुरू हुई थी खूनी रंजिश
घर आए जीजा को मछली और शराब की दावत देने की तैयारी में गांव के तालाब से मछली पकड़ने पर हुए विवाद ने उसकी जिंदगी बदल दी और वह जरायम की दुनिया में उतर गया। ग्रामीणों की मानें तो बलराज का बड़ा भाई फौज में है, वह अपने परिवार के साथ वहीं रहता है। छोटा भाई बलराज सीधे स्वभाव का था। पिता गजराज खेती करते थे। बलराज की बहनों की शादी हो गई थी।
वर्ष 2004 में बलराज और पप्पू कटार के बीच दुश्मनी का बीज पनपा था। बलराज की बहन व जीजा वर्ष 2004 में उसके घर आए हुए थे। बलराज ने अपने जीजा को दावत देने को गांव के ही एक तालाब से मछली पकड़ ली थी। तालाब पर उस समय क्षेत्र में अपनी पैंठ जमाने वाला पप्पू कटार दावा ठोकता था। मछलियों पर पप्पू कटार अपना अधिकार समझता था। ग्रामीणों ने बताया कि जिस तालाब से मछली निकालने को लेकर विवाद पनपा था उस पर कटार अपना दावा ठोकता था और बलराज उस तालाब को गांव वालों का तालाब बताता था।
बलराज के मछली पकड़ने से नाराज पप्पू ने साथियों संग बलराज को पीटा और फिर पुलिस से भी पिटवाया था। महीनों तक बलराज बिस्तर पर रहा और पप्पू से बदला लेने की साजिश रचता रहा। वर्ष 2007 में बलराज की दोस्ती सिकंदराबाद के गांव प्राणगढ़ निवासी बदमाश सोनू से हुई। दोनों ने पहली हत्या की सुपारी ली, लेकिन अपने पहले ही मिशन में वह फेल रहा और हत्या की कोशिश के मामले में जेल गया। जेल में बलराज की मुलाकात कुख्यात अपराधी सुंदर भाटी से हुई थी। जेल के अंदर ही बलराज सुंदर भाटी का खास बन चुका था।
2009 से शुरू की हत्या की वारदातें जेल से छूटने पर उसने 2009 में सिकंदराबाद थाना क्षेत्र निवासी व्यक्ति जयप्रकाश की सुपारी ली थी और हत्या कर दी। तीन साल तक बलराज शांत रहा और दिसंबर 2012 में शिकारपुर क्षेत्र में ही उसने पप्पू और उसकी पत्नी सुनीता की गोली मारकर हत्या कर दी। वर्ष 2013 में बलराज ने कुख्यात अपराधी नंदू उर्फ रावण की 11 फरवरी 2013 को बिजनौर में पुलिस कस्टडी में ही गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी।