शहर में चलने वाले सात सीटों वाले ऑटो के चालकों ने मनमाने ढंग से अचानक किराया बढ़ा दिया है। अब आलम यह है कि यात्री उतरने के बाद 10 का नोट आगे बढ़ाते हैं तो ऑटो चालक नोट थाम गाड़ी आगे बढ़ा देता है। यात्री ठगा-सा महसूस कर अपनी राह हो लेता है। कुछ लोग तो ऑटो के पीछे दौड़ भी लगा रहे हैं। मनमानी वसूली पर पूरे दिन शहर में कई जगह तकरार दिखी। प्रस्तुत है संवाददाता सुशील पांडेय और फोटोग्राफर राजन राय की रिपोर्ट :
नोएडा : मुंहमांगा पैसा लेकर चलते बने ऑटो चालक, दोगुनी वसूली से सवारियां अवाक
बढ़ा हुआ किराया देकर अपनी राह हो लिए
एचसीएल चौराहा, सेक्टर-11 शाम 04:00 बजे
मुन्ना मेहता सेक्टर-2 गोल चक्कर से एचसीएल चौराहे पर उतरे। यहां तक का किराया पहले 5 रुपये था। जब उन्होंने 10 रुपये का नोट बढ़ाया तो चालक ने पैसे जेब में डाले और आगे बढ़ गया। ठगा सा महसूस करते हुए भी वे अपनी राह हो लिए। पूछने पर बताते हैं कि क्या करें, जाना जरूरी था। बिना बताए किराया बढ़ा दिया। पूछो तो ऑटो चालक लड़ने लगते हैं।
कहीं भी जाओ, किराया 5 रुपए ज्यादा
सेक्टर-12-22 तिराहा, शाम 04:30 बजे
सेक्टर-11 से चलकर योगेंद्र सिंह 12-22 तिराहे पर उतरते हैं। उनसे भी चालक ने 10 रुपये लिए। इस बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि शहर में आप कहीं भी जाओ तो पुराने किराये में 5 रुपये बढ़ाकर लिए जा रहे हैं। यही नहीं, उनका तो यह भी कहना है कि जो ज्यादा किराया नहीं ले रहे हैं, ऐसे चालकों को परेशान भी किया जा रहा है।
....और ऑटो के पीछे लगा दी दौड़
मामूरा चौराहा, शाम 05:00 बजे
ऑटो से एक अधेड़ शख्स उतरता है। किराये को लेकर उसकी ऑटो चालक से झड़प होती है और वह मन मसोसता हुआ आगे बढ़ जाता है। इसके बाद एक अन्य ऑटो से धर्मेंद्र नामक यात्री उतरता है। जैसे ही वह रुपये देते हैं तो ऑटो चालक आगे बढ़ने लगता है। इस पर धर्मेंद्र विरोध करते हैं। चालक उनकी बातों को अनसुना करते हुए आगे बढ़ने लगता है। इस पर उन्होंने ऑटो के पीछे दौड़ लगा दी। कुछ दूर तक दौड़ने के बाद वह लौट आए। पूछने पर बताया कि मैं सेक्टर-71 से यहां तक हमेशा 5 रुपये में आता था। आज इसने मुझसे 10 रुपये लिए और फरार हो गया। उसने मेरी बात भी नहीं सुनी।
कौन करेगा कार्रवाई, संशय बरकरार
अवैध तरीके से ऑटो के बढ़े हुए किराये पर कार्रवाई कौन करेगा, इस पर अब भी संशय बना हुआ है। जानकारों की मानें तो इस पर परिवहन विभाग कार्रवाई करता है, लेकिन वहां शिकायतों के लिए कोई नंबर नहीं है। यही नहीं, ट्रैफिक पुलिस किन धाराओं में ऑटो चालक पर कार्रवाई करेगी, यह साफ नहीं है। ऑटो को बंद करने पर भी अभी कोई नियम स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। प्रशासन ने भी कुछ नहीं किया है।