गलघोंटू से 12 बच्चों की मौत के मामले में उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने गलती मान ली है। महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में इलाज के लिए न तो बच्चों को माकूल सुविधाएं मिलीं और न ही एंटी डिप्थीरिया सीरम।
6-19 सितंबर के दौरान महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में 11 और लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में 1 बच्चे की मौत गलघोंटू की दवा और उचित इलाज न मिलने पर हो गई थी।
मामला सामने आने के बाद उत्तरी नगर निगम के मेयर आदेश कुमार गुप्ता ने जांच के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त आयुक्त की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी को तीन दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।
मेयर आदेश कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को किंग्सवे कैंप स्थित महर्षि वाल्मीकि अस्पताल का दौरा कर हालात का जायजा लिया। अभी भी वहां तीन-चार बच्चे ऐसे हैं, जिनकी हालत गंभीर है। इस पर मेयर ने अस्पताल प्रशासन को 12 घंटे के अंदर इन बच्चों को एंटी डिप्थीरिया सीरम मुहैया करवाने के आदेश दिए हैं।
मेयर ने कहा कि जांच रिपोर्ट में चिकित्सकीय या प्रशासनिक गलती सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मेयर ने कहा कि फिर ऐसी घटना न हो, इसके लिए पूरी सावधानी बरती जा रही है। दवा की कमी क्यों और कैसे हुई, इसकी भी जांच की जाएगी। वहीं, स्थायी समिति की अध्यक्ष वीणा विरमानी ने बताया कि जिन 12 बच्चों की मौत हुई है, उनमें 11 पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं।