दिल्ली के पालम में हुई भीषण आगजनी की घटना ने झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में एक ही परिवार के नौ सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई, वहीं दो भाइयों, अनिल (32) और सचिन (28), को इस दुखद सच से अनजान रखा जा रहा है।
दोनों भाई आग में गंभीर रूप से झुलस गए हैं और फिलहाल शहर के दो अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। अस्पताल में भर्ती दोनों भाइयों को यह बताने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं कि उनके अपने अब इस दुनिया में नहीं रहे।
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Delhi Fire
- फोटो : अमर उजाला
यह हृदयविदारक घटना बुधवार को पालम कॉलोनी की एक चार मंजिला रिहायशी-सह-व्यावसायिक इमारत में हुई। आग इतनी भीषण थी कि उसने देखते ही देखते पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में परिवार की मुखिया लाडो कश्यप (70), उनके तीन बच्चे कमल (39), प्रवेश (33) और हिमांशी (22), कमल की पत्नी आशु (35) और उनकी तीन बेटियां निहारिका (15), इवानि (6) और जैसिका (3) के साथ-साथ अनिल की पत्नी दीपिका (28) की भी जान चली गई।
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Delhi Fire
- फोटो : अमर उजाला
सच छिपाने की कोशिश, दिल दहला देने वाले बयान
इस आग ने एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों को लील लिया, जिसमें कुल 19 सदस्य थे। परिवार के सदस्य कौशल कश्यप (42), अपने भतीजों को सच बताने से हिचकिचा रहे हैं। कौशल ने बताया कि "मैं उन्हें यह कैसे बता सकता हूं कि उनकी मां, भाई, बहन, भाभी और तीन भतीजियां अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे खुद इतनी नाजुक स्थिति में हैं?" उन्होंने आगे कहा, "मैंने उन्हें बताया है कि सभी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। मुझमें सच कहने का साहस नहीं है।"
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पालम इलाके में बुधवार को हुए अग्निकांड घटनास्थल पर बृहस्पतिवार को फॉरेंसिक टीम जांच करते हुए
- फोटो : भूपिंदर सिंह
हादसे के वक्त, कौशल ने दीपिका से फोन पर बात की थी, जो मदद की गुहार लगा रही थी। दीपिका ने कहा था, "जल्दी आओ। हमारा घर जल रहा है। मैं सांस नहीं ले पा रही हूं।" इसके बाद फोन कट गया और फिर कोई संपर्क नहीं हो सका।
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पालम इलाके में बुधवार को हुए अग्निकांड घटनास्थल पर बृहस्पतिवार को फॉरेंसिक टीम जांच करते हुए
- फोटो : भूपिंदर सिंह
आग का मंजर और बचाव कार्य की विफलता
आग की लपटों में घिरे घर से लोगों को निकालने का प्रयास भी अत्यंत दर्दनाक रहा। दूसरी मंजिल पर मौजूद लाडो और हिमांशी के शव बुरी तरह जल चुके थे। सचिन, जो उसी मंजिल पर था, आग की चपेट में आने से पहले छत पर भागने में सफल रहा, लेकिन उसे 25% तक जलने की चोटें आईं। उसका चेहरा, सिर, छाती और हाथों पर गंभीर चोटें हैं और वह सफदरजंग अस्पताल में भर्ती है।