बारिश के बाद दिल्ली-एनसीआर की हवा में कुछ सुधार, वायु गुणवत्ता सूचकांक अब भी 200 के पार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली और आसपास के इलाकों में बुधवार रात हुई बूंदाबांदी की वजह से दिल्ली सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बहुत खराब की श्रेणी से एक पायदान खिसककर खराब श्रेणी में आ गई है।
गुरुवार को लोधी रोड पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के पार है। यहां पीएम 2.5 209 रहा और पीएम 10 202 पर है। इस तरह दोनों ही स्तरों पर हवा की गुणवत्ता अब भी खराब स्तर पर ही बनी हुई है।
#Delhi: PM 10 level at 202 and PM 2.5 level at 209, both in 'Poor' category on Air Quality Index (AQI), at Lodhi Road. pic.twitter.com/7J0K8Y9LTH
— ANI (@ANI) November 15, 2018
केंद्रीय मौसम और हवा निगरानी एजेंसी सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकॉस्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक यह राहत बिना तापमान में गिरावट के बूंदाबांदी और पंजाब की ओर से दिल्ली की तरफ आ रही हवा की दिशा बदलने से मिली है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा में मौजूद पर्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 का स्तर भी तेजी से गिरा है। हालांकि, अब भी लोगों को सचेत रहने की जरूरत है।
सफर के मुताबिक सतह पर मंद हवा चलने और तापमान में गिरावट के कारण अगले तीन दिन में फिर प्रदूषण में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, आबोहवा अभी बहुत खराब श्रेणी में ही रहने की उम्मीद है। वहीं, पंजाब-हरियाणा की तरफ से आने वाली प्रदूषित हवा का रुख भी दिल्ली की तरफ नहीं है ऐसे में राहत मिलनी तय है।
पांच से दो गुना पर आया पर्टिकुलेट मैटर
सीपीसीबी के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के मुताबिक 13 नवंबर की रात आठ बजे तक दिल्ली-एनसीआर की हवा में पर्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 का स्तर सामान्य से पांच गुना अधिक था। लेकिन बूंदाबांदी के कारण इसका स्तर दो गुना रह गया है।
बुधवार शाम 6 बजे तक पीएम 10 सामान्य मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से करीब दो गुना अधिक 257 रिकॉर्ड किया गया। वहीं, पीएम 2.5 भी सामान्य मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से करीब दो गुना अधिक 157 माइक्रोग्राम रिकॉर्ड किया गया।
हालांकि, चिकित्सकों की सलाह है कि प्रदूषण से बचने के लिए बेहतर मास्क का इस्तेमाल और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले फलों का आहार लेना सेहत के लिए मुनासिब होगा।
एनसीआर की हालत भी सुधरी
एनसीआर की हालत भी सुधरी
वहीं, सीपीसीबी की ओर से मंगलवार को जारी 24 घंटे की औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर शहरों का एक्यूआई बहुत खराब (301-399) के बीच बना हुआ है। दिल्ली में 4 नवंबर के बाद से अब तक का यह सबसे अधिक सुधार है। सीपीसीबी ने अब भी अपनी हेल्थ एडवाइजरी में बीमार लोगों को विशेष ख्याल रखने और सामान्य लोगों को खुले वातावरण में मेहनत वाले काम से बचने को कहा है।
पराली जलाने से हुआ गंगा का मैदानी भाग प्रभावित
पराली जलाने से हुआ गंगा का मैदानी भाग प्रभावित
विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र, नई दिल्ली के विशेषज्ञ विवेक भट्टाचार्य ने बताया कि गंगा के मैदानी भागों में आने वाले राज्यों में बीते आठ दिनों से हवा की गुणवत्ता लाल रंग यानी बहुत खराब और गंभीर श्रेणी में बनी हुई है। इसकी बड़ी वजह धान की कटाई और खेतों में बचे अवशेषों को जलाना है। अब खासतौर से उत्तर भारत और मध्य भारत के राज्यों में मौसम के बदलाव होने से कमोबेश यही स्थिति है।
दिल्ली-एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक
दिल्ली-एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक
शहर एक्यूआई स्थिति
14 नवंबर 13 नवंबर 12 नवंबर 11 नवंबर 10 नवंबर
दिल्ली 312 409 399 405 401
फरीदाबाद 339 438 454 461 440
गाजियाबाद 352 438 423 440 403
नोएडा 332 426 401 445 386
ग्रेटर नोएडा 348 411 454 436 420
नोट : सीपीसीबी के मुताबिक 301 से 399 का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)बहुत खराब और 400 से अधिक एक्यूआई गंभीर श्रेणी वाली वायु गुणवत्ता को दर्शाता है। लंबे समय तक ऐसी हवा के संपर्क में रहने से श्वास संबंधी व अन्य बीमारियां हो सकती हैं।