शराब के शौकीनों को मयखाने से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। प्राइवेट दुकानों की जगह सरकारी व्यवस्था के तहत दुकानें तो खुल गई हैं लेकिन वहां मनपसंद ब्रांड का टोटा है। बीयर का स्टॉक भी गायब है। ऐसे में कई लोग पब, बार, रेस्टोरेंट की तरफ रूख कर रहे हैं तो वहीं आदत से मजबूर लोग पसंद का ख्याल किए बगैर जो भी मिल रहा है उसी को खरीद रहे हैं।
नहीं मिल रही मनपसंद बोतल: मयखाने से मायूस लौट रहे शराब के शौकीन, बोल रहे- बड़ी महंगी हुई शराब; थोड़ी-थोड़ी...
सरकारी व्यवस्था के तहत शराब की दुकान खुले चार दिन बीत गए लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे आनन-फानन में लाइसेंस जारी किया गया है। हालांकि आबकारी विभाग का कहना है कि दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम, दिल्ली राज्य औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकास निगम, दिल्ली दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम समेत अन्य उपक्रम इसी महीने में 500 शराब की दुकान खोल लेंगे। इसके साथ एयरपोर्ट की तरह ही मेट्रो स्टेशन में भी बड़ी संख्या में शराब की बिक्री की जाएगी। कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स, शॉपिंग सेंटर, मॉल में भीड़ अधिक होती है लिहाजा इस परिसर में भी दुकानें खोली जाएंगी।
शराब की दुकानों में सीसीटीवी कैमरा लगवाना लाइसेंसधारियों के लिए अनिवार्य शर्त है। अभी तक खुले सभी 350 दुकानों पर इसकी अनिवार्यता है, लेकिन कई दुकानों में अभी तक इस शर्त को पूरा नहीं किया गया है। दरअसल अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए इस आवश्यकता है।
अधिकारियों का कहना है कि हर हाल में कालाबाजारी को रोका जाएगा। अवैध शराब की आपूर्ति ना हो इसे लेकर भी मुस्तैदी की गई है। हर तरह की संभावना को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि लोगों को अच्छी क्वालिटी की शराब मिल सके।
सरकारी दुकानों पर छूट का खेल बंद हो गया है। 31 अगस्त तक लोगों ने प्राइवेट दुकानों से जमकर इस छूट का फायदा उठाया लेकिन अब नहीं मिलने से मायूसी हाथ लग रही है। इतना ही नहीं ब्रांड की गैर मौजूदगी में उसी कीमत पर अन्य ब्रांड की बोतल से काम चलाना पड़ रहा है। ग्राहक मनीष कुमार बताते हैं प्राइवेट दुकानों से शराब की सबसे छोटी बोतल 75 रुपये में दो मिल जाती थीं तो वहीं अब सिर्फ एक बोतल के लिए 125 रुपया चुकाना पड़ रहा है। इसी तरह केन बीयर जहां 140 रुपया में दो मिलती थी अब 140 रुपये में एक मिल रही है वह भी ऐसे ब्रांड का जिसका कभी नाम भी नहीं सुनने को मिला था।
वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जब एक बोतल पर एक बोतल प्राइवेट कंपनी वाले दे सकते हैं तो सरकारी दुकानों पर एक बोतल का मूल्य कम क्यों नहीं किया जा सकता है। स्पष्ट है कि सरकार ज्यादा टैक्स लगा कर कमाई ज्यादा कर रही है।