सुपर चोर सिद्धार्थ को तलाश करने के लिए दिल्ली पुलिस ने एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया। काफी प्रयासों के बाद पुलिस ने गूगल से आरोपी की पहचान करने का प्रयास किया।
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- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के पास आरोपी की सीसीटीवी में कैद फोटो के अलावा कुछ नहीं था। जांच के दौरान नोएडा में गूगल पर छपी खबर ‘अधिकारी का बेटा चोरी में गिरफ्तार’ देखकर पुलिस को उसे पकड़ने में मदद मिली। पुलिस अधिकारियों ने सिद्धार्थ के परिवार से संपर्क किया तो पता चला कि परिवार उसे काफी समय पूर्व बेदखल कर चुका है। आरोपी परिवार से कोई संपर्क नहीं रख रहा था।
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वहीं छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि वह बार-बार फोन नंबर और अपना घर बदल देता है। फेसबुक पर सिद्धार्थ की प्रोफाइल चेक किया गया तो 27 जुलाई को अपलोड की गई उसकी एक फोटो फेसबुक पर दिखी। फोटो में सिद्धार्थ एक फोर्ड कार पर बैठा हुआ था। कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पुलिस कार मालिक सिद्धार्थ के दोस्त विकास तक पहुंची। वहां से पुलिस को सिद्धार्थ का एक मोबाइल नंबर मिला।
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जांच के दौरान चोरी की वारदात में उस नंबर की लोकेशन वसंतकुंज की ही मिली। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर सिद्धार्थ को पीतमपुरा से दबोच लिया। इसके बाद माल के खरीदार जीतू व सिद्धार्थ के साथी अनुराग को दबोचा गया। इनकी निशानदेही पर चुराया गया सामान भारी मात्रा में बरामद हुआ।
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जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सिद्धार्थ इससे पूर्व 2013 में अशोक विहार व मयूर विहार में चोरी की चार और 2015 में नोएडा में चोरी की 7 वारदातों में शामिल रहा है। फिलहाल वसंतकुंज में वह 18 वारदातों में शामिल रहा था। नोएडा में 34 लाख चोरी करने के बाद उसने चोरी के रुपये से नई क्रूज कार व स्पोर्ट्स बाइक खरीदी थी।