विदेशी लेजर व यूएस आर्मी की पिस्टलों सहित गैंगस्टर गडगू गिरफ्तार
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अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि करतार गैंग का कुख्यात बदमाश ज्ञानेंद्र व उसका गैंग सुंधू पहलवान-हिम्मत गैंग के लीडर राजू डंडू की हत्या करने की योजना बना रहे हैं। इस बीच 4 जून को डीसीपी राजीव शर्मा, एसीपी जितेंद्र सिंह और इंस्पेक्टर पूरनपंत की टीम को सूचना मिली थी कि गैंग के बदमाश बवाना नहर के पास खेड़ा-खुर्द गांव से गुजरने वाले हैं। पुलिस ने गांव के पास रोहिणी सेक्टर-27 के पास पिकेट लगा ली। इस बीच हुंडई वर्ना कार सवार बदमाश मौके पर पहुंचे। खुद को घिरता देखकर बदमाशों ने हवलदार सतीश व सिपाही सोनू पर गोली चला दी। खुद को बचाकर दोनों ने अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से बदमाशों को काबू किया।
चार लोगों की एक साथ की थी हत्या
पुलिस की मानें तो ज्ञानेंद्र ने बहादुरगढ़ में 2011 में हिम्मत गैंग के चार लोगों की एक साथ हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने हिम्मत को भी मार डाला था। ज्ञानेंद्र पर हत्या व जबरन वसूली, हत्या के प्रयास के छह मामले दर्ज हैं। हरियाणा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख का इनाम घोषित किया हुआ था। वहीं राजीव दहिया तीन मामलों में कोर्ट से भगोड़ा घोषित है और उस पर 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
उन्नत किस्म के हैं बरामद हथियार
ज्ञानेंद्र और राजीव दहिया के पास से बरामद आधुनिक हथियारों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारी दावा कर रहे हैं कि बदमाशों के पास से बरामद हथियार दुनिया भर में बेहद उन्नत किस्म के हैं। ब्राजील की टोरस कंपनी की 9एमएम की लेजर पिस्टल रात के समय 100 मीटर तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम है। वहीं .455 की पिस्टल भी वियतनाम की बनी है। यूएस आर्मी वाले इस पिस्टल का इस्तेमाल करते हैं। वहीं अलग-अलग किस्म के 66 होलो कारतूस जो शरीर में आर-पार नहीं होते, बल्कि शरीर के अंदर जाकर फट जाते हैं। दूसरी ओर विदेशी कारबाइन में दो मैगजीन लग सकती हैं। पुलिस बदमाशों से पूछताछ कर पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियार कहां से आए। हालांकि, शुरुआती जांच में पता चला है कि इन्होंने एक पिस्टल वियतनाम से मंगाई है।
दो दशकों से ज्यादा से चली आ रही गैंगवार
पूछताछ के दौरान ज्ञानेंद्र ने बताया कि वह करतार मंडौथी गैंग का सदस्य है। करीब वर्ष 1992 से करतार गैंग और सुंधू पहलवान-हिम्मत गैंग के बीच गैंगवार चली आ रही है। दो दशकों के बीच दिल्ली-एनसीआर व हरियाणा में दोनों ओर से दर्जनों लोगों की हत्या कर दी गई। दोनों गैंग दिल्ली-एनसीआर में अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ते रहे। 1992 में हिम्मत गैंग ने करतार गैंग के ताज पहलवान की हत्या कर दी। इसके बाद नीरज बवानिया के मामा व हिम्मत गैंग के कुख्यात बदमाश काला असोदिया ने करतार गैंग के दो और बदमाशों को मार दिया। दोनों ओर से कई हत्याओं के बाद 2009 में दोनों गैंग ने एक दूसरे पर हमला न करने का समझौता कर लिया। लेकिन 2011 में हिम्मत गैंग के बदमाशों ने ज्ञानेंद्र उर्फ गडगू पर हमला कर दिया। ज्ञानेंद्र ने इसका बदला लेने के लिए बहादुरगढ़ में हिम्मत गैंग के चार बदमाशों की कार में एक साथ हत्या कर दी। इसके कुछ दिनों बाद उसने हिम्मत को भी मार दिया। घटना के बाद से नीरज बवानिया और ज्ञानेंद्र के बीच भी दुश्मनी हो गई। पुलिस ने ज्ञानेंद्र की गिरफ्तारी पर इनाम घोषित कर दिया।