महज चार दिनों के भीतर सत्यबाला की हंसती-खेलती जिंदगी में ऐसा तनाव आया कि वे इसका बोझ संभाल नहीं सकीं और बेटी के साथ मौत का दामन थाम लिया। पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मानें, तो शनिवार को सीबीआई छापे के बाद से सत्यबाला काफी परेशान हो गई थीं। इसके बाद से ही मां-बेटी ने फ्लैट से बाहर निकलना बंद कर दिया था। उन्हें अपने परिवार के भविष्य की चिंता सताने लगी थी। उन्हें डर था कि इस दलदल में उनका बेटा भी तो नहीं फंस जाएगा।
CBI छापे की बदनामी से IAS अधिकारी की पत्नी-बेटी ने दी जान
माना जा रहा है कि इसी तनाव को वे सहन नहीं कर सके और मौत को गले लगा लिया। पड़ोसियों ने बताया कि बदनामी के डर से नेहा व उसकी मां ने अपने आपको फ्लैट में कैद कर लिया था। शनिवार के बाद से किसी ने उनको फ्लैट के बाहर निकलते हुए भी नहीं देखा था।
पड़ोसियों से कम ही था मेलजोल- नीलकंठ अपार्टमेंट में सत्यबाला और उसके परिवार का पड़ोसियों से कम ही मेलजोल रहता था। करीब 12 साल से परिवार इस सोसायटी में रह रहा था, लेकिन पड़ोसियों के घर उनका आना-जाना न के बराबर था। अक्सर बस बाहर आते-जाते समय ये लोग हाय-हैलो कर लिया करते थे। नेहा सोसायटी के मंदिर में रोजाना जाती थी। वहीं कुछ पड़ोसियों से मुलाकात हो जाती थी।
एक पड़ोसी ने बताया कि वर्ष 2004 में बीके बंसल ने सोसायटी में रहना शुरू किया था। वह पड़ोसियों से कम ही वास्ता रखते थे। योगेश भी लोगों से कम ही मिलता था। परिवार पहली मंजिल पर 3-बी में रहता था, जबकि इन लोगों ने दूसरी मंजिल पर 3-सी फ्लैट भी खरीद लिया था। बीके बंसल की गिरफ्तारी के बाद पड़ोसियों को सीबीआई की छापेमारी का पता चला। सीबीआई ने बंसल के कुछ पड़ोसियों से भी पूछताछ की है।
कोई नहीं जानता था कि इतने बड़े पद पर है बंसल
सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष आरआर ओझा ने बताया कि अपार्टमेंट में किसी को पता ही नहीं था कि बीके बंसल इतने बड़े पद पर तैनात है। लोगों को बस इतना पता था कि कोई सरकारी नौकरी करते हैं। कुछ लोगों को बंसल ने बताया था कि वीआरएस लेकर प्रॉपर्टी कंसलटेंसी का काम शुरू कर दिया है।