प्रदेश में तीन साल के भाजपा शासन में पहली बार रविवार को गुरुग्राम में मुख्यमंत्री का जनता दरबार लगा। 300 समस्याएं रखी गई, लेकिन औपचारिकता से आगे नहीं बढ़ पाया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के रहते हुए भी किसी भी समस्या का तत्काल समाधान नहीं हो पाया। जनता दरबार में संबंधित अधिकारियों की लापरवाही की शिकायत के बावजूद मुख्यमंत्री का तेवर तल्ख नहीं दिखा। केवल एक मामले में मुख्यमंत्री ने जांच अधिकारी के निलंबन के आदेश दिए। एक मामले में विधायक का गांव में दौरा नहीं करने की शिकायत भी जनता ने मुख्यमंत्री से की।
5 घंटे लगा जनता दरबार, CM को गिनाई यह समस्याएं
जनता दरबार में 300 में से केवल 57 मामले को मुख्यमंत्री ने सुना। बाकी शिकायतों को नत्थी करके रख लिया गया। इस पर प्रशासन को कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। संबंधित विभागों के अधिकारियों को 10 दिन में कार्रवाई करके एक्शन टेकन रिपोर्ट उनके पास भेजने के निर्देश दिए हैं। जनता दरबार के साथ जिला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक हुई। उसमें भी 28 मामले रखे गए, लेकिन तत्काल समाधान नहीं मिला। ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मीडिया को भी दूर रखा गया।
गुरुग्राम के सिविल लाइन स्थित स्वतंत्रता सेनानी जिला परिषद् हॉल में पहली बार हो रहे जनता दरबार से लोगों को बहुत उम्मीद थे। सुबह 07.00 बजे से लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सभी लोगों की समस्या को लेकर एक टोकन दिया गया। करीब 300 लोगों ने अपनी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के जनता दरबार में पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री ने सभी की समस्याओं को सुनने के बजाय कुछ समस्याआें को सुनने के बाद चलते बने। जनता दरबार में पहुंचे अधिकांश समस्याएं बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हुई थी तो कुछ अधिकारियों की लापरवाही और काम नहीं करने को लेकर था। इनमें से कई मामले तो ऐसे थे, जिनका पहले सीएम विंडो पर शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक उनका निपटारा नहीं हुआ या उसे बंद कर दिया गया है। जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि उस मामले में अब तक उचित कार्रवाई नहीं हुई है।
बिल्डरों के मामले को मुख्यमंत्री ने टरकाया
जनता दरबार में बिल्डरों से जुड़ी समस्याओं को लेकर एक दर्जन से अधिक लोग पहुंचे, लेकिन शिकायतकर्ताओं को मुख्यमंत्री से जनता दरबार से कोई हल नहीं मिला। सभी मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक महीने का इंतजार कर लें, हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का काम जल्द शुरू होने वाला है। जल्द ही चेयरमैन नियुक्त होंगे। उसके बाद समस्याओं का समाधान होगा। अपेक्स सोसाइटी की शिकायतकर्ता नरेंद्र ने सीधे तौर पर कहा कि इस मामले में डीटीपी कोई काम नहीं कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, यदि ज्यादा परेशानी है तो कोर्ट जाओ। एक शिकायतकर्ता गुरदीप सिंह का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री के दरबार में भी समाधान नहीं मिले तो फिर ऐसे दरबार का क्या फायदा।
इस मामले में मुख्यमंत्री ने की कार्रवाई
गांव घाटा निवासी ने बताया कि उसके घर का बिजली मीटर तथा तार आदि बिजली सामान चोरी हो गया था। जिसकी पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद शिकायत दर्ज की है। उसके बाद भी जांच अधिकारी एएसआई चरण सिंह मामले की जांच सहीं ढंग से करने की बजाय शिकायतकर्ता को ही धमका रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने एएसआई को निलंबित करने के आदेश दिए। वहीं, महेंद्रगढ़ में दबंगों के पीटने के बाद 21 माह बाद हरिजन आयोग के आदेश पर मामला दर्ज हुआ है। इलाज के लिए पीड़ित संदीप को लेकर परिवार वाले मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंचे, वहां से तत्काल सिविल अस्पताल भेजा गया और सिविल सर्जन को इलाज कराने के लिए कहा गया।