आज दशहरा है। बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को जलाकर लोग जश्न मनाएंगे। बुराई पर अच्छाई की जीत से लोग उत्साहित होंगे। हालांकि यह हर साल होता है। यही वजह है कि इस बार लोग कई अन्य परेशानियों को भी रावण के पुतले के साथ भस्म होते देखना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए आपको और हम सबको कंधे से कंधे मिलाकर साथ देना होगा। तभी इन परेशानियों से निजात मिल पाएगी।
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काश! रावण दहन के साथ ये 10 परेशानियां भी हो जातीं भस्म
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 11 Oct 2016 12:09 PM IST
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1- जाम की समस्या है आम
शहर में जाम की समस्या आम हो गई है। इससे निजात पाने के लिए शहर के 23 प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से जाम को लेकर सर्वे भी किया जा रहा है। लेकिन यह समस्या दूर नहीं हो पा रही है। सुबह और शाम के पीक आवर में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर भी काफी प्रयास किए गए। लेकिन शहर को जाम की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पाई है।
शहर में जाम की समस्या आम हो गई है। इससे निजात पाने के लिए शहर के 23 प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से जाम को लेकर सर्वे भी किया जा रहा है। लेकिन यह समस्या दूर नहीं हो पा रही है। सुबह और शाम के पीक आवर में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर भी काफी प्रयास किए गए। लेकिन शहर को जाम की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पाई है।
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2- अतिक्रमण का जाल हर ओर
शहर में अतिक्रमण का जाल लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सेक्टर-18 सहित अन्य सेक्टरों के अलावा गांवों में भी अतिक्रमण का जाल घटने के बजाए बढ़ता जा रहा है। अतिक्रमण के भी कई रूप हो गए हैं। कहीं तो यह स्थायी है तो कहीं अस्थायी। हालांकि इससे निजात दिलाने के लिए अधिकारियों की ओर से किसी तरह की बड़ी कार्रवाई नहीं होती।
शहर में अतिक्रमण का जाल लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सेक्टर-18 सहित अन्य सेक्टरों के अलावा गांवों में भी अतिक्रमण का जाल घटने के बजाए बढ़ता जा रहा है। अतिक्रमण के भी कई रूप हो गए हैं। कहीं तो यह स्थायी है तो कहीं अस्थायी। हालांकि इससे निजात दिलाने के लिए अधिकारियों की ओर से किसी तरह की बड़ी कार्रवाई नहीं होती।
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- फोटो : विवेक निगम
3- टूटी सड़कें कब होंगी ठीक
बारिश के बाद शहर की सड़कों का हाल बेहाल हो चुका है। कई सड़कें टूटी पड़ी हैं। इस बार टूटी सड़कों के रिपेयरिंग में लापरवाही बरती जा रही है। अगर ऐसा नहीं होता तो सड़कों में गड्ढे नहीं दिखते। हालांकि यहां गांवों में भी सड़कों के निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही है। आलम यह है कि सेक्टर-62 में टूटी पड़ी सड़कों पर जैसे तरह पैचअप कर काम चलाया जा रहा है।
बारिश के बाद शहर की सड़कों का हाल बेहाल हो चुका है। कई सड़कें टूटी पड़ी हैं। इस बार टूटी सड़कों के रिपेयरिंग में लापरवाही बरती जा रही है। अगर ऐसा नहीं होता तो सड़कों में गड्ढे नहीं दिखते। हालांकि यहां गांवों में भी सड़कों के निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही है। आलम यह है कि सेक्टर-62 में टूटी पड़ी सड़कों पर जैसे तरह पैचअप कर काम चलाया जा रहा है।
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- फोटो : कुमार संजय
4- यातायात नियम तोड़ते वाहनों की भरमार
शहर में यातायात नियम तोड़ने में वाहन चालक सबसे आगे हैं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद इनकी संख्या में कोई कमी नजर नहीं आती। रोजाना 200-250 चालान होने के बावजूद नियम तोड़ने वाले सामने आ जाते हैं। सबसे ज्यादा रांग साइड और अवैध पार्किंग के मामले सामने आते हैं। यही नहीं हेलमेट नहीं पहनने और बिना सीट बेल्ट के गाड़ी चलाने में भी नोएडा के निवासी आगे हैं। यहां जरूरी यह है कि लोगों को खुद ही जागरूक होना होगा और नियमों को मानना होगा।
शहर में यातायात नियम तोड़ने में वाहन चालक सबसे आगे हैं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद इनकी संख्या में कोई कमी नजर नहीं आती। रोजाना 200-250 चालान होने के बावजूद नियम तोड़ने वाले सामने आ जाते हैं। सबसे ज्यादा रांग साइड और अवैध पार्किंग के मामले सामने आते हैं। यही नहीं हेलमेट नहीं पहनने और बिना सीट बेल्ट के गाड़ी चलाने में भी नोएडा के निवासी आगे हैं। यहां जरूरी यह है कि लोगों को खुद ही जागरूक होना होगा और नियमों को मानना होगा।