विशेष सीबीआई कोर्ट ने 226 पेज के फैसले में सीबीआई की थ्योरी को सही माना कि भोजपुर फर्जी एनकाउंटर में मारे गए चारों युवक निहत्थे थे। पुलिस उन्हें चाय की दुकान से जीप में उठाकर ले गई थी।
आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने के लिए पुलिसकर्मियों ने दो युवकों को पुलिया पर और दो को ईंख के खेत में मार गिराया था। मुठभेड़ साबित करने के लिए उनके पास तमंचे रख दिए थे और उनसे 16 राउंड फायर किए जाने का दावा किया था। इस मामले में 112 लोगों की गवाही हुई।
दोषी करार दिया गया तत्कालीन भोजपुर एसओ लाल सिंह डिप्टी एसपी से रिटायर्ड हो चुका है। वह विजयनगर के प्रताप विहार में रहता है। एसआई जोगेंद्र अच्छनेरा आगरा का रहने वाला है, इसने करीब छह माह पहले वीआरएस ले लिया है। कांस्टेबल सुभाष इंचौली मेरठ का रहने वाला है, जबकि सूर्यभान सराय इनायत इलाहाबाद का।
सूर्यभान बांदा में तैनात है। सीबीआई लोक अभियोजक राजन दहिया ने बताया कि सुनवाई के दौरान जोगेंद्र गायब हो गया था, बाद में उसकी अलग से सुनवाई हुई।
5 of 7
फर्जी एनकाउंटर में मारा गया युवक अशोक
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि पुलिस ने मुठभेड़ को सही बताने वाले करीब 35 लोगों के एफिडेविट पेश किए थे। इनमें से कुछ तो कोर्ट में आए ही नहीं, जो लोग आए उनमें से अधिकांश ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने एफिडेविट पर उनसे हस्ताक्षर कराए थे, यानी एफिडेविट भी फर्जी थे।