भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में 5 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों को 5 सितंबर तक नजरबंद रखने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए महाराष्ट्र सरकार से गुरुवार तक मामले पर जवाब देने के लिए कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भी जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी। इसके साथ ही सभी आरोपियों की ट्रांजिट रिमांड पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। बता दें कि मामले में पुणे पुलिस ने मंगलवार को देश भर में कई नक्सल समर्थकों के आवास पर छापे मारे और माओवादी समर्थक वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, बरनोन गोंजालविस और गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया है।
भीमा कोरेगांव हिंसा: कौन हैं गौतम नवलखा और सुधा भारद्वाज, दिल्ली से क्या है खास कनेक्शन
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कौन हैं गौतम नवलखा
नवलखा दिल्ली में रहने वाले पत्रकार हैं और पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) से जुड़े रहे हैं। वह प्रतिष्ठित पत्रिका ‘इकनॉमिक एंड पोलिटिकल वीकली’ के संपादकीय सलाहकार हैं। उन्होंने सुधा भारद्वाज के साथ मिलकर गैर-कानूनी गतिविधि निरोधक कानून 1967 को निरस्त करने की मांग की थी। उनका कहना है कि गैरकानूनी संगठनों की गतिविधियों के नियमन के लिए पारित किए गए इस कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है। पिछले दो दशकों से अक्सर कश्मीर का दौरा करते रहे नवलखा ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर काफी लिखा है।
सुधा भारद्वाज फरीदाबाद की रहने वाली हैं। वह दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। वह मानवाधिकार संगठन पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) में राष्ट्रीय सचिव हैं। इसके अलावा सुधा एक्टिविस्ट के तौर पर भूमि अधिग्रहण की नीतियों का भी विरोध करती रही हैं। आईआईटी से टॉपर होकर निकलने के बाद भी सुधा को करियर का आकर्षण बांधे नहीं रख सका और अपने वामपंथी रुझान के कारण वो 80 के दशक में छत्तीसगढ़ के यूनियन लीडर शंकर गुहा नियोगी के संपर्क में आयी और फिर उन्होंने छत्तीसगढ़ को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया।
महाराष्ट्र पुलिस ने ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज के फरीदाबाद में इरोज गार्डन के घर करीब पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान दो साइबर एक्सपर्ट ने सुधा और उनके परिजनों के फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर व अन्य सोशल साइट्स के साथ ही उनके कंप्यूटर, लैपटॉप भी खंगाले। उनके घर से कई दस्तावेज, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन, पत्रिका जब्त की गईं।
मराठी में दिखाएं कागजात
सुधा की बेटी मायशा ने बताया कि पुलिस ने उन्हें वकील से भी बात नहीं करने दी। पुलिस ने पंचनामा मराठी में बनाया, जबकि उन्हें मराठी नहीं आती है। मायशा के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब 7 बजे महाराष्ट्र पुलिस की टीम ने उनके घर में दबिश दी। टीम में दो महिला पुलिसकर्मी भी थीं। इस दौरान उन्होंने कुछ कागज उनकी मां सुधा भारद्वाज को दिखाए, जिसके बाद उन्होंने घर में तलाशी शुरू की।