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चोटी कटने से भी ज्यादा चौंका देने वाली अफवाहों को झेल चुके हैं कई देश, जानिए कैसे
प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा
Updated Wed, 09 Aug 2017 02:39 PM IST
सार
कई देशों में हो चुकी हैं सामूहिक उन्माद की घटनाएं
-झूठ बोलने वाला नहीं जानता, झूठ और सच का फर्क
-लाई डिटेक्टर टेस्ट से भीे सच सामने आना मुश्किल
नोएडा।
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चोटी कटने की घटना के पीछे जहां मनोवैज्ञानिक सामूहिक उन्माद (मास हिस्टीरिया) जैसी मानसिक परेशानी को जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं, कई लोग ऐसे दावों पर प्रश्न उठाते हैं। लोगों का मानना है कि एक साथ कई लोगों को मानसिक समस्या कैसे हो सकती है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा हो सकता है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।
काटने वाली नन
पंद्रहवीं शताब्दी में यूरोप में ही एक नन ने लोगों को काटना शुरू कर दिया। जिसके बाद कई ऐसे मामले सामने आए। कुछ समय बाद ये घटनाएं बंद हो गईं। कई डॉक्टरों ने इसका कारण ननों के जीवन में लगी पाबंदियों की वजह से उपजा सामूहिक उन्माद माना।
नाचते लोग
वर्ष 1518 में स्टेनबगई में सड़क चलते एक आदमी ने नाचना शुरू कर दिया। इसके बाद एक-एक कर कई लोग सड़क पर नाचने लगे। यह क्त्रस्म कई दिनों तक चलता रहा। इस दौरान लगातार नाचने से कई लोग हार्टअटैक और घुटन से मर भी गए। बाद में प्रशासन ने सख्ती दिखाकर इसे बंद कराया। इस घटना के पीछे भी डॉक्टरों ने लोगों के मन में बसा अवसाद माना।
अजीब फ्लू
वर्ष 2012 में श्रीलंका में एक स्कूल के कुछ बच्चों ने सरदर्द और खांसी की शिकायत की। धीरे-धीरे ऐसी शिकायतें बढ़ती गईं। अन्य स्कूलों के छात्र शिक्षक भी ऐसी घटनाओं का जिक्त्रस् करने लगे। डॉक्टरी जांच में लोगों को ऐसी कोई शारीरिक समस्या नजर नहीं आई। बल्कि उस समय की कुछ परिस्थितियों के कारण उपजा सामूहिक उन्माद का केस लगा, जो धीरे-धीरे बंद हो गया।
पंद्रहवीं शताब्दी में यूरोप में ही एक नन ने लोगों को काटना शुरू कर दिया। जिसके बाद कई ऐसे मामले सामने आए। कुछ समय बाद ये घटनाएं बंद हो गईं। कई डॉक्टरों ने इसका कारण ननों के जीवन में लगी पाबंदियों की वजह से उपजा सामूहिक उन्माद माना।
नाचते लोग
वर्ष 1518 में स्टेनबगई में सड़क चलते एक आदमी ने नाचना शुरू कर दिया। इसके बाद एक-एक कर कई लोग सड़क पर नाचने लगे। यह क्त्रस्म कई दिनों तक चलता रहा। इस दौरान लगातार नाचने से कई लोग हार्टअटैक और घुटन से मर भी गए। बाद में प्रशासन ने सख्ती दिखाकर इसे बंद कराया। इस घटना के पीछे भी डॉक्टरों ने लोगों के मन में बसा अवसाद माना।
अजीब फ्लू
वर्ष 2012 में श्रीलंका में एक स्कूल के कुछ बच्चों ने सरदर्द और खांसी की शिकायत की। धीरे-धीरे ऐसी शिकायतें बढ़ती गईं। अन्य स्कूलों के छात्र शिक्षक भी ऐसी घटनाओं का जिक्त्रस् करने लगे। डॉक्टरी जांच में लोगों को ऐसी कोई शारीरिक समस्या नजर नहीं आई। बल्कि उस समय की कुछ परिस्थितियों के कारण उपजा सामूहिक उन्माद का केस लगा, जो धीरे-धीरे बंद हो गया।
कई ऐसी अफवाहें जिसका तार्किक कारणों का पता नहीं चल सका
किसिंग बग- अमेरिका(1899)
अमेरिका में वर्ष 1899 में किसिंग बग की अफवाह फैली थी। जिसमें माना गया कि एक उड़ने वाला कीड़ा लोगों के होंठो पर काटता है, जिससे लोगों के होठ में सूजन आ जाती है। यह अफवाह वहां के एक अखबार में छपी खबर के बाद फैली थी।
लादेन खुजली-अमेरिका (2001)
अमेरिका में हुए 11 सितंबर के आतंकी हमले के बाद वहां स्कूलों में बच्चों के शरीर पर खुजली की शिकायतें मिली। ऐसी अफवाहें फैली कि किसी बायो टेरर की वजह से बच्चों के शरीर पर खुजली वाले दाने आ रहे हैं। बाद में पता चला कि कुछ शरारती बच्चों ने शरीर पर सैंड पेपर रगड़ कर दानों के निशान बना दिए थे।
पिंडली पलटना-अमेरिका लूसियाना (1939)
अमेरिका के लूसियाना में एक स्कूल के डांस प्रोग्राम के बाद यह अफवाह फैली। एक छात्रा ने डांस कार्यक्रम के बाद पिंडली पलटने की शिकायत की। धीरे-धीरे अन्य छात्राएं भी ऐसी शिकायतें करने लगीं। इसमें कई ऐसी छात्राएं थी, जो डांस में भाग नहीं ली थी।
किसिंग बग- अमेरिका(1899)
अमेरिका में वर्ष 1899 में किसिंग बग की अफवाह फैली थी। जिसमें माना गया कि एक उड़ने वाला कीड़ा लोगों के होंठो पर काटता है, जिससे लोगों के होठ में सूजन आ जाती है। यह अफवाह वहां के एक अखबार में छपी खबर के बाद फैली थी।
लादेन खुजली-अमेरिका (2001)
अमेरिका में हुए 11 सितंबर के आतंकी हमले के बाद वहां स्कूलों में बच्चों के शरीर पर खुजली की शिकायतें मिली। ऐसी अफवाहें फैली कि किसी बायो टेरर की वजह से बच्चों के शरीर पर खुजली वाले दाने आ रहे हैं। बाद में पता चला कि कुछ शरारती बच्चों ने शरीर पर सैंड पेपर रगड़ कर दानों के निशान बना दिए थे।
पिंडली पलटना-अमेरिका लूसियाना (1939)
अमेरिका के लूसियाना में एक स्कूल के डांस प्रोग्राम के बाद यह अफवाह फैली। एक छात्रा ने डांस कार्यक्रम के बाद पिंडली पलटने की शिकायत की। धीरे-धीरे अन्य छात्राएं भी ऐसी शिकायतें करने लगीं। इसमें कई ऐसी छात्राएं थी, जो डांस में भाग नहीं ली थी।
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हैडहंट- ब्रूनेई (1979)
दक्षिण पूर्व एशिया के देश ब्रूनेई में यह अफवाह फैली कि सरकार निर्माण कार्य के लिए इंसानो का इस्तेमाल कर रही है। इसके लिए लोगों का अपहरण कराया जा रहा है। जिसके बाद सिर काटकर उसे ब्रिज या अन्य किसी इमारत के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
समाज के वंचित या पाबंदियों में रहने वाले लोगों के मन में अक्सर कुठाएं जन्म लेती हैं। अधिकतर मामलों में यह कुंठाएं मन में ही दबी रहती हैं। लेकिन जब कोई अफवाह फैलती है तो लोग खुद को उससे जोड़कर देखने लगते हैं। ऐसे लोगों को पता ही नहीं चलता कि कब उनका अवचेतन उन्हें ऐसी हरकतें करने को प्रेरित करता है। जो सामान्य तौर पर वो करने से कतराते हैं।- डॉ.संस्कृति
विक्टम के ऊपर लाई डिटेक्टर टेस्ट करना भी सही नहीं है। क्योंकि वह जानबुझकर ऐसा नहीं करते बल्कि उनका अवचेतन उनसे ये कराता है।- डॉ.जीआर गुलेचा
दक्षिण पूर्व एशिया के देश ब्रूनेई में यह अफवाह फैली कि सरकार निर्माण कार्य के लिए इंसानो का इस्तेमाल कर रही है। इसके लिए लोगों का अपहरण कराया जा रहा है। जिसके बाद सिर काटकर उसे ब्रिज या अन्य किसी इमारत के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
समाज के वंचित या पाबंदियों में रहने वाले लोगों के मन में अक्सर कुठाएं जन्म लेती हैं। अधिकतर मामलों में यह कुंठाएं मन में ही दबी रहती हैं। लेकिन जब कोई अफवाह फैलती है तो लोग खुद को उससे जोड़कर देखने लगते हैं। ऐसे लोगों को पता ही नहीं चलता कि कब उनका अवचेतन उन्हें ऐसी हरकतें करने को प्रेरित करता है। जो सामान्य तौर पर वो करने से कतराते हैं।- डॉ.संस्कृति
विक्टम के ऊपर लाई डिटेक्टर टेस्ट करना भी सही नहीं है। क्योंकि वह जानबुझकर ऐसा नहीं करते बल्कि उनका अवचेतन उनसे ये कराता है।- डॉ.जीआर गुलेचा