रोहिणी के विजय विहार स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय पर छापेमारी के बाद से नित नये खुलासे हो रहे हैं। आश्रम में रहने वाले महिला अनुयायियों के परिवार वालों ने यहां के संचालक वीरेंद्र देव दीक्षित पर लाखों की रकम डकारने का भी आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि बाबा यह रकम दहेज के नाम पर लेता था। पीड़ित परिवार वालों ने बताया कि आश्रम में आने के बाद लड़कियों को नशीली दवा देकर उनका ब्रेेन वॉश कर दिया जाता था। लड़कियां पूरी तरह से बाबा के लिए समर्पित हो जाती थी और आश्रम से जाना नहीं चाहती थी।
इस बात का बाबा फायदा उठाता था और फिर लड़कियों के परिजनों से कहता था कि अगर लड़कियां उनके पास होती तो उसकी शादी करनी पड़ती। शादी के लिए उन्हें दहेज भी देना पड़ता। परिजनों के हामी भरने पर वह उनसे कहता था कि वह उस रकम को आश्रम में दान कर दे।
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baba virendra dev dixit
- फोटो : अमर उजाला
पीड़ित परिवार वालों का कहना है कि बाबा इस तरह से बात करता था कि वह लड़कियों के परिवार वालों को भी सम्मोहित कर लेता था। लोग अपनी जमीन और मकान बेचकर रुपये का इंतजाम करते थे और फिर बाबा को लाखों रुपये सौंप देते थे।
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- फोटो : अमर उजाला
रुपये लेने के बाद बाबा उसका कोई रसीद नहीं देता था। बाबा सिर्फ एक हजार रुपये से नीचे का रसीद देता था। परिवार वालों के मुताबिक रुपये लेने के बाद बाबा दस रुपये के स्टांप पर लड़कियों के परिवार वालों से यह लिखवा लेता था कि लड़कियां अब आश्रम में ही रहेगी और अपने घर नहीं जाएगी। उसके बाद बाबा लड़कियों को आश्रम में बंधक बना लेता था।