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अटाली हिंसा: इन पीड़ितों की दास्तां सुन आप भी रो पड़ेंगे

Thu, 04 Jun 2015 08:20 PM IST
Updated Thu, 04 Jun 2015 08:20 PM IST
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अटाली हिंसा: इन पीड़ितों की दास्तां सुन आप भी रो पड़ेंगे

Atali violence: you hear these peoples story than you would also weep

गांव अटाली, समय 12:00 बजे, गांव का बस अड्डा, जहां बृहस्पतिवार को भी अधिकांश दुकानें बंद रहीं। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान चाय की चुस्की ले रहे थे। गांव के अंदर जाने वाली गली पर बैरियर लगे थे। लेकिन गांव की गमगीन स्थिति आंसुओं से भरी ये आंखें बयां कर रही हैं।


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यहां आने-जाने वाले लोगों की पूछताछ की जा रही थी। थोड़ी दूर चलने पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के घर दिखाई दिए। इन घरों में बिखरे पत्थर, रोड़े, तोड़फोड़ के निशान, आगजनी से हुए काले धब्बे और आग की वजह से काली हो चुकी जमीन पूरी स्थिति को बयां करने के लिए काफी थी।

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घर वापस पहुंचे लोग पानी के सहारे इसे साफ करना चाहते हैं, लेकिन पानी भी इस कालिख को धो नहीं पा रहा है। गली में बने एक घर में बैठा सहाबुद्दीन इस उधेड़बुन में लगा था कि वह कैसे घर की मरम्मत कराए। घर में पंखा, वॉशिंग मशीन, टेबल, मेज आदि सब सामान टूट चुका है।

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यहां तक कि उत्पातियों ने बिजली के बोर्ड को भी तोड़ दिया। 232 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी पर काम करने वाले सहाबुद्दीन का जन्म इसी गांव में हुआ था। उससे बात करने पर वह चिंता में डूब गया। बोला, भैंस के लिए 70 हजार रुपये निकाले थे, लेकिन वह भी संघर्ष में किसी ने चुरा लिए। बहू के लिए बड़े अरमान से नई चेन बनवाई थी। वो भी अब नहीं मिल रही। अलमारी खुली हुई मिली।


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इसी घर की सदस्य आसिन पहुंची। महिला बोली, मीडिया नहीं होता तो हमारी कौन सुनता। उसने दुखी मन से घर दिखाया। रात कैसे कटी, इस सवाल पर वह फफक-फकक कर रोने लगी।

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