इमारत में फंसे लोगों को निकालने गए दमकलकर्मियों ने बताया कि एक ही कमरे से 30 लोगों को निकाला गया। इनमें से ज्यादातर लोग बेहोश थे। उन्हें एक-एक कर बाहर निकालने के बाद पास के अस्पताल में पहुंचाया गया। इनमें से ज्यादातर की दम घुटने से मौत हो गई।
अनाज मंडी अग्निकांडः एक ही कमरे में बेहोश मिले 30 लोग, सीधे अस्पताल में खुली आंख
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दमकलकर्मियों ने बताया कि डिविजन फायर ऑफिसर राजेश शुक्ला ने लोगों को बाहर निकला। सांस के जरिये उनके शरीर में धुआं चला गया। वह दूसरी बार सुरक्षा उपकरणों के साथ पहुंचे और लोगों को बाहर निकाला। पर्याप्त एंबुलेंस नहीं होने की वजह से पीड़ितों को ऑटो और निजी गाड़ियों से अस्पताल भेजा गया।
चीखते-चिल्लाते हुए बेहोश बर्न विभाग में खुली आंख
लोकनायक अस्पताल के बर्न विभाग में भर्ती मुस्तफा भी उसी इमारत में सो रहे थे, जिसमें रविवार सुबह आग लगी थी। सोते-सोते धुएं की वजह से उनकी सांस फूलने लगी थी और वे घबराहट में नींद से जागे। उठकर बैठे तो सामने आग की लपटें दिखाई दीं। वे खुद को बचाने के लिए हड़बड़ाकर उठे और इधर-उधर भागने लगे, लेकिन तब तक आग काफी बढ़ चुकी थी। तीसरी मंजिल से नीचे उतरने के लिए वे बाहर निकले, लेकिन सीढ़ियों तक पहुंच नहीं पाए और बेहोश होकर गिर गए। इसके बाद उन्हें कुछ भी याद नहीं है।
रविवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे उन्हें होश आया तो वे बर्न विभाग में भर्ती थे। आसपास के बिस्तरों पर पहचान के साथियों को देखकर वे घबरा गए। सुबह करीब 11 बजे जब उनसे मिलने परिजन पहुंचे, तो उन्हें बेहतर महसूस हुआ। हालांकि, परिजनों के अनुसार मुस्तफा को इस घटना के बारे में नहीं बताया गया है न ही वार्ड में भर्ती बाकी मरीजों को कुछ बताया है। डॉक्टरों के अनुसार, मुस्तफा का करीब 10 फीसदी शरीर आग में झुलस गया है। उनका बायां हाथ भी झुलसा हुआ है।
भीड़ के कारण फ्लाईओवर पर थमी रफ्तार
अनाज मंडी इलाके में हुए हृदय विदारक घटना की जिसे भी खबर लगी वह सीधा घटनास्थल पर पहुंच गया। रानी झांसी रोड फ्लाईओवर पर भीड़ जमा होने से वाहनों की रफ्तार थम गई। सड़क से भीड़ को हटाने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ा। यातायात सुचारु कराने के लिए भी पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।