लोकनायक अस्पताल की मोर्चरी के बाहर रविवार को मौजूद सैकड़ों लोग भूखे-प्यासे थे। करीब 24 घंटे से मोर्चरी के पास खड़े इन लोगों को न एक कप चाय नसीब हुई थी और न ही पानी। पुरानी दिल्ली के नवेद, जमाल और शकील अपने दोस्तों के संग भूखे इनके लिए फरिश्ते बनकर पहुंचे।
अनाज मंडी अग्निकांडः फरिश्ते बनकर आए नवेद, जमाल और शकील, तस्वीरें हैं गवाह
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उन्होंने एक हजार लोगों को छोले, चावल व आलू मिक्स बिरयानी बांटी। मोर्चरी के ठीक सामने लोगों की भूख देखकर इनका दिल द्रवित हो गया। सभी दोस्त वापस गए और सोमवार रात को 1500 लोगों के लिए भोजन तैयार करने में जुट गए।
अमर उजाला से बातचीत में जामा मस्जिद इलाके के निवासी मोहम्मद नवेद ने बताया कि रविवार को वे दो दोस्तों के साथ मोर्चरी के सामने से गुजरते समय उन्होंने भारी भीड़ देखी। रात में वे फिर वहां से गुजरे तो भी उतनी ही भीड़ थी। उन्होंने लोगों से पूछा तो हादसे की जानकारी मिली। उन्होंने कुछ लड़कों को ठंड में कंपकंपाते भी देखा।
नवेद और उसके दोस्तों ने घर जाकर योजना बनाई। सोमवार दोपहर नवेद, मसूक खान, मुर्सलीन, हाजी शकील, इसरार अहमद, जमालुद्दीन, साजिद और अराफात करीब एक हजार लोगों के लिए भोजन लेकर पहुंचे। इन दोस्तों को भीड़ की संख्या के बारे में सही जानकारी नहीं थी। वे थोड़ी-बहुत चाय भी बनाकर ले गए थे, लेकिन वह कम पड़ गई। खाना बांटने के बाद सभी दोस्त घर लौटे और सोमवार रात का खाना बनाने की तैयारी शुरू कर दी। रात करीब 7 बजे सभी दोस्त वहां पहुंचे और सभी को खाना लिया।
जीबी पंत के गेट के बाहर बांटते हैं खाना
नवेद खान ने बताया कि आमतौर पर हर सोमवार जीबी पंत अस्पताल के बाहर गेट नंबर 6 पर ये सभी दोस्त मिलकर भोजन बांटते हैं। इसके लिए न इनका कोई संगठन है और न ही ये किसी से चंदा लेते हैं। उन्होंने बताया कि मृतकों के परिजनों से बातचीत में पता चला कि एलएनजेपी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भी कई मरीज और उनके तीमारदार हैं। ये भी कल से भूखे हैं। इसलिए सोमवार रात को वहां भी इन्होंने भोजन वितरित किया।