क्या आपके घर में भी कभी ऐसे दरवाजे लगा करते थे?
पौराणिक मान्यता के अनुसार गुड़गांव महाभारत काल का है। इसको सिद्ध करने के लिए खांडसा स्थित एकलव्य का मंदिर है। इसके अलावा, यहां के गली-मोहल्लों के कई बंद दरवाजे शहर के पुरातन होने का राज खोलते नजर आते हैं। (रिपोर्ट व फोटोः यशलोक सिंह/डेजी वर्मा/अमर उजाला)
क्या आपके घर में भी कभी ऐसे दरवाजे लगा करते थे?
साइबर सिटी की गिनती अब आधुनिक शहर में होने लगी है पर यह काफी पुराना और ऐतिहासिक शहर है। गगनचुंबी इमारतों, चमचमाते मॉल्स और कॉरपोरेट कार्यालयों के बीच कुछ ऐसे अवशेष आज भी मौजूद हैं जो इस बात को प्रमाणित करते हैं यह एक प्राचीन शहर है। मुगलकालीन और अंग्रेजों के समय की कुछ धरोहरें गुड़गांव और इसके आसपास के क्षेत्रों में हैं।
क्या आपके घर में भी कभी ऐसे दरवाजे लगा करते थे?
गुड़गांव के सबसे पुराने रिहायशी क्षेत्रों में रोशनपुरा, जैकबपुरा और कमान सराय के नाम आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र दो सौ से ढाई सौ वर्ष पहले बसा था। तब अंग्रेजों का राज यहां चलता था। यहां आज भी कुछ ऐसी इमारतें हैं जिनकी स्थापत्यकला और पच्चीकारी बताती हैं कि यह कुछ सदी पुरानी हैं।
क्या आपके घर में भी कभी ऐसे दरवाजे लगा करते थे?
इन इमारतों में बंद दरवाजे और ताले इसके पुरातन होने का प्रमाण देते हैं। वहीं गांव वजीराबाद और बादशाहपुर में भी कुछ ऐसी हवेलियां और घर हैं जो हैं तो अपने जमाने की ऐतिहासिकता को बयां करती हैं।
क्या आपके घर में भी कभी ऐसे दरवाजे लगा करते थे?
यहां सदियों पुरानी इमारतों की स्थापत्यकला राजस्थान से प्रेरित रही है। इमारतों की बनावट और नक्काशी पूरी तरह से राजस्थानी कला से ओतप्रोत है। जानकारों का कहना है कि गुड़गांव की पुरानी इमारतों में बने आले, शिखर और दरवाजों पर खुदी नक्काशी का नजारा राजस्थान में बहुतायत में देखी जा सकती है।