सपा ने अपनी नई मीडिया पैनलिस्ट की सूची में अपनी फायर ब्रांड नेत्री पंखुड़ी पाठक का नाम नहीं दिया। जिसके फौरन बाद ही निवर्तमान पैनलिस्ट पंखुड़ी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि सपा पार्टी में रहने से उनका दम घुटता है।
पंखुड़ी पाठक दिल्ली की रहने वाली हैं। पंखुड़ी सपा से लगभग 8 साल पहले 2010 में जुड़ी थीं। पंखुड़ी अक्सर न्यूज चैनलों पर होने वाली डिबेट में सपा की ओर से शामिल होती रहीं और पूरे जोश के साथ पार्टी का पक्ष लोगों के सामने रखती रहीं। छात्र जीवन से सक्रिय राजनीति में आने वाली पंखुड़ी का कोई राजनैतिक बैकग्राउंड नहीं है, इसके बाद भी वह राष्ट्रीय राजनीति में सपा का बेहद चर्चित चेहरा रही हैं।
इनका जन्म 1992 में दिल्ली में हुआ था। इनके पिता का नाम जेसी पाठक और माता का नाम आरती दोनों डॉक्टर हैं। उनका एक छोटा भाई भी है जिसका नाम चिराग है। पंखुड़ी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से लॉ कर चुकी हैं। उन्होंने साल 2010 चुनाव जीतकर जॉइंट सेक्रेटरी भी रही हैं।
पंखुड़ी समाजवादी पार्टी के छात्र संगठन (समाजवादी छात्र सभा) से जुड़ गई। इससे सपा को बहुत फायदा और पंखुड़ी ने सपा को मजबूत बनाने का काम भी किया। इनके काम को देखते हुए साल 2013 में लोहिया वाहिनी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। पंखुड़ी अखिलेश यादव और डिंपल यादव से बहुत प्रभावित रही।
पंखुड़ी की शख्शियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें विपक्ष के कई बड़े नेता ट्विटर पर फॉलो करते हैं। बात साल 2017 की है, जब पंखुड़ी को सोशल मीडिया पर एक शख्स ने रेप की धमकी दी थी। इसका उन्हें और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध किया। आरोपी को सोशल मीडिया की मदद से ही पकड़वाया भी गया। इस कांड के बाद से ही पंखुरी अचानक से फोकस में आ गई थीं।